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राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ '17 वां एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड' समारोह

उत्तर प्रदेश और गुजरात को प्रदान किया गया एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड'

उत्तर प्रदेश और गुजरात को प्रदान किया गया एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड'

मुख्य बिंदु
  • राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित एक निजी होटल में आयोजित समारोह में देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ '17 वें राष्ट्रीय एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड' प्रदान किए।
  • दो प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत यह अवार्ड उत्तर प्रदेश और गुजरात को प्रदान किए गए।
  • इन राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए वहां के कृषि मंत्रियों ने यह अवार्ड ग्रहण किए।
  • राज्यपाल श्री बागडे ने इस दौरान धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और स्वास्थ्यप्रद फसलों के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
  • उन्होंने कहा कि कृषि देश की विशाल आबादी को खाद्यान्न ही प्रदान नहीं करती बल्कि उद्योगों को कच्चा माल प्रदान कर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का भी बड़ा आधार है।
  • उन्होंने कहा कि आज भी देश की आधी आबादी को आजीविका और रोजगार कृषि ही प्रदान करती है।
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राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ '17 वां एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड' समारोह

जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित एक निजी होटल में आयोजित समारोह में देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ '17 वें राष्ट्रीय एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड' प्रदान किए। दो प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत यह अवार्ड उत्तर प्रदेश और गुजरात को प्रदान किए गए। इन राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए वहां के कृषि मंत्रियों ने यह अवार्ड ग्रहण किए।

राज्यपाल श्री बागडे ने इस दौरान धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और स्वास्थ्यप्रद फसलों के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कृषि देश की विशाल आबादी को खाद्यान्न ही प्रदान नहीं करती बल्कि उद्योगों को कच्चा माल प्रदान कर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का भी बड़ा आधार है।

उन्होंने कहा कि आज भी देश की आधी आबादी को आजीविका और रोजगार कृषि ही प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद में कृषि और संबद्ध उद्योग आज भी 18 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं।

राज्यपाल ने एम.स्वामीनाथन की चर्चा करते हुए कहा कि देश में जिस में खाद्यान्न संकट था, जब उन्होंने कृषि उत्पादन बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया और देश आत्मनिर्भर हुआ परन्तु आज जब देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर है, यह जरूरी है कि धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने के साथ पोषक फसलों के उत्पादन की ओर किसानों को प्रेरित किया जाए।

उन्होंने जैविक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए जागरूकता का प्रसार किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण के लिए भी विशेष प्रयास किए जाने का आह्वान किया और कहा कि पानी की बचत ही उसका उत्पादन है।

उन्होंने कम पानी में अधिक उत्पादन की फसलों और आधुनिक तकनीक से राज्यों को कृषि समृद्ध बनाने का आह्वान किया।