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संस्कृति मेला 2025 का हुआ आयोजन विधार्थी, संकाय सदस्य एवं अधिकारियों ने मेले का लुफ्त उठाया

संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देता है संस्कृति मेला ....

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर राजस्थान विद्यापीठ के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से महाविद्यालय प्रांगण में संस्कृति मेले 2025 का आयोजन किया गया।
  • प्रशिक्षणार्थी छात्राध्यापकों को भावी व्यवसायिक जीवन में आने वाले दायित्वों के निर्वहन और भारतीय परंपराओं से रूबरू करवाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए मेले का शुभारंभ कुलपति प्रो.
  • सारंदेवोत, कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर प्राचार्य प्रो.
  • भवानी पाल सिंह राठौड ने सरस्वती की प्रतिमा सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर व फीता काट कर किया।
  • सारंगदेवोत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी बना रही है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का उत्कृष्ट प्रयास हैं।
  • उन्होंने बताया कि फास्ट फूड के जमाने में पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत करना संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा इससे छात्रों में कार्यक्रम संचालन, प्रबंधन और बाजार की समझ विकसित होती है।
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संस्कृति मेला 2025 का हुआ आयोजन विधार्थी, संकाय सदस्य एवं अधिकारियों ने मेले का लुफ्त उठाया

उदयपुर राजस्थान विद्यापीठ के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से महाविद्यालय प्रांगण में संस्कृति मेले 2025 का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षणार्थी छात्राध्यापकों को भावी व्यवसायिक जीवन में आने वाले दायित्वों के निर्वहन और भारतीय परंपराओं से रूबरू करवाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए मेले का शुभारंभ कुलपति प्रो. एस.एस. सारंदेवोत, कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग, डॉ. भवानी पाल सिंह राठौड ने सरस्वती की प्रतिमा सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर व फीता काट कर किया।

कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी बना रही है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का उत्कृष्ट प्रयास हैं।

उन्होंने बताया कि फास्ट फूड के जमाने में पारंपरिक व्यंजन प्रस्तुत करना संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा इससे छात्रों में कार्यक्रम संचालन, प्रबंधन और बाजार की समझ विकसित होती है।

उन्होने कहा कि वर्तमान समय में बदली जीवनचर्या में पारंपरिक भोजन के स्वास्थ्य लाभ को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें पुनः अपने प्राचीन खानपान की ओर लौटना होगा।

प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने बताया कि दिन भर चले मेले में विधार्थी, संकाय सदस्य एवं अधिकारियों ने मेले का लुफ्त उठाया।

मेले में पारंपरिक से लेकर आधुनिक व्यंजनों तक विविध प्रकार के 30 से अधिक स्टॉल लगाए जिसमें फ्रूट कस्टर्ड, पानी पूरी, बाजरे की रोटी, केर-सांगरी, कढ़ी - लौकी के मुठिये, पास्ता, मेथी गोटे-कढ़ी, सेव पुरी, कप केक, भेल-राबड़ी, वड़ा पाव, गुलाबी पानी पुरी, पकौड़ी, साबूदाने की खिचड़ी, पाव भाजी, दाबेली, अमेरिकन कॉर्न चाट विशेष आकर्षण रहे।

मेले गेम्स स्टॉल भी रहे आकर्षण का केंद्र।

इस मौके पर प्रो. गजेन्द्र माथुर, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. अनिता कोठारी सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, मंत्रालयिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं अभिभावकों ने मेले का आनंद उठाया।