उदयपुर। दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उदयपुर लोकल सेंटर की वार्षिक साधारण सभा में वर्ष 2026–2028 की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने पदभार ग्रहण किया।
इंजी. पीयूष जावेरिया ने अध्यक्ष और इंजी. रमेश चन्द्र पुरोहित ने मानद सचिव का पदभार संभाला।
निवर्तमान अध्यक्ष इंजी. पुरुषोत्तम पालीवाल ने स्वागत किया, जबकि निवर्तमान मानद सचिव इंजी. पीयूष जावेरिया ने सत्र 2025–2026 की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
कार्यकारिणी में डॉ. राधा चरण वर्मा, इंजी. दीपक टांक, इंजी. हसनुद्दीन पठान, इंजी. राजकुमार सिंह चौहान, इंजी. निशित जैन, इंजी. विजय लाल जैन, इंजी. गिरीश कुमार जोशी, इंजी. गोपीकांत तिवारी, इंजी. सैयद इरशाद अली, इंजी. निर्मल कुमार व्यास, इंजी. दुर्गा दत्त श्रीपत एवं इंजी. हितांशु कौशल शामिल हैं।
संस्था के नवनिर्वाचित अध्यक्ष इंजी. पीयूष जावेरिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव बुद्धिमत्ता के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसे और अधिक प्रभावी बनाने वाले सहायक उपकरण के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
इसके उपयोग से समय की बचत के साथ कार्यों की गुणवत्ता एवं सटीकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में स्थापित दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) देश की सबसे प्रतिष्ठित एवं पुरानी राष्ट्रीय इंजीनियरिंग संस्थाओं में से एक है।
इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं के अभियंताओं को एक साझा मंच प्रदान करने वाली इस संस्था का देशभर में व्यापक नेटवर्क है। इसके 124 केंद्रों से लगभग 2.63 लाख कॉर्पोरेट सदस्य जुड़े हुए हैं।
उदयपुर लोकल सेंटर के लिए यह गौरव की बात है कि वर्ष 2026–28 के लिए उन्हें अध्यक्ष निर्वाचित होने का अवसर मिला है। वे संस्था के इतिहास में सबसे कम आयु के अध्यक्षों में से एक हैं।
उन्होंने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ युवा इंजीनियरों के प्रति संस्था के विश्वास और नई पीढ़ी को नेतृत्व देने की परंपरा का प्रतीक बताया।
AI का जिम्मेदार उपयोग जरूरी: मुख्य वक्ता इंजी. दीपक टांक, सीनियर इंजीनियरिंग मैनेजर, ट्विलियो (अमेरिका) ने ‘AI Without the Hype: What Every Engineer Should Know’ विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI, लार्ज लैंग्वेज मॉडल और ChatGPT की कार्यप्रणाली एवं उपयोग समझाते हुए कहा कि स्पष्ट निर्देशों से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
AI मानव की निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने का साधन है। उन्होंने डीपफेक, वॉइस स्कैम और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।
संस्थान के वाइस प्रेसिडेंट इंजी. सज्जन सिंह यादव ने कहा कि AI के गुण-दोष समझकर उसका उपयोग करना चाहिए। इससे कार्यक्षमता बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।
उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता विकसित करने, मोबाइल से दूरी रखने, रिवर्स इंजीनियरिंग अपनाने और निरंतर सीखने पर जोर दिया।
नवनिर्वाचित मानद सचिव इंजी. रमेश चन्द्र पुरोहित ने व्याख्यान का सार प्रस्तुत कर मुख्य वक्ता का आभार जताया तथा नए सत्र में तकनीकी, व्यावसायिक एवं सामाजिक गतिविधियों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का विश्वास व्यक्त किया।
निवर्तमान अध्यक्ष इंजी. पुरुषोत्तम पालीवाल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन इंजी. रमेश चन्द्र पुरोहित ने किया।
