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खेत बचाओ अभियान के तहत रबी कृषक संगोष्ठी का आयोजन

उदयपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा दिनांक 22.10.2026 को खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम

उदयपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा दिनांक 22. 10. 2026 को खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

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खेत बचाओ अभियान के तहत रबी कृषक संगोष्ठी का आयोजन

उदयपुर । कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा दिनांक 22.10.2026 को खेत बचाओ अभियान के तहत कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम में जनजाति क्षेत्र के 60 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया।

कार्यक्रम में डॉ शंकर लाल जाट, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, चित्तौड़गढ़ ने किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि किसानो को मिटटी के स्वास्थ्य और घटती उर्वरता पर चिंता जताते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने पर जोर दिया।

रासायनिक उर्वरको की आपूर्ति में कठिनाई और उनके मूल्यों में वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान शुरू किया। रासायनिक उवर्रकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग केवल खेती की लागत ही नहीं बढ़ाता, बल्कि खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी कम करता है।

इसके अतिरिक्त भूजल भी दूषित होता है। उर्वरको का अंसतुलित उपयोग खेती के सामने गंभीर चुनौती बन रहा है।

उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अंतत उनके लिए घाटे का सौदा ही सिद्ध होता है, क्योंकि प्रारंभ में तो फसल अच्छी होती है, लेकिन समय के साथ खेतों की मिट्टी दूषित हो जाने के कारण उपज प्रभावित होती है।

केन्द्र के डॉ. रतन लाल सोलकी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने किसानों को अपने खेत की मिटटी जांच करवारकर (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) मिटटी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग अपनाने और फसल की आवश्यकता के अनुसार संतु‌लित पोषक तत्व प्रबंधन के आधार पर फसलो में संतुलित खाद प्रयोग करने की सलाह दी, किसानो को जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट का अधिक उपयोग करने एवं प्राकृतिक खेती को भी अपनाने का किसानो से आव्हान किया, साथ ही फसल चक अपनाने और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई, जिससे मिटटी की गुणवत्ता बनी रहे।

श्री संजय कुमार धाकड, कार्यक्रम सहायक ने किसानो को बताया कि यह अभियान जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर जोर देगा, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करेगा।

उर्वरकों के उचित उपयोग, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और उपयुक्त फसलों और किस्मों के साथ अंर्तफसल खेती के बारे में जागरूकता पैदा करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

कृषि मशीनीकरण और उन्नत तकनीको के क्षेत्र प्रदर्शन इस अभियान के प्रमुख घटक होंगे।