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Jaislmer news

रिफॉर्म उत्सव‘ के माध्यम से वाटरशेड विकास सुधारों को जमीनी स्तर तक पहुँचाया जाएगा

9593 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जारहा है वाटरशेड सुधारों की जानकारी का प्रसार

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जैसलमेर । राजस्थान सरकार भारत सरकार के साथ मिलकर ‘रिफॉर्म उत्सव‘ के माध्यम से नागरिक-केंद्रित वाटरशेड विकास सुधारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुँचाने का प्रयास कर रही है। इसका उदेश्य जागरूकता, जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देना है।

इस पहल को जन योजना अभियान ¼PPC½- सबकी योजना, सबका विकास के साथ एकीकृत किया जा रही है, जिसकी शुरूआत 2 अक्टुबर 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी।

राज्य के जिला जैसलमेर में इसके अंतर्गत 08 ग्राम पंचायतोें में वाटरशेड विकास से संबंधित सुधारों एवं जानकारी का प्रसार किया जाएगा।

इसके बाद राज्य-स्तरीय, जिला-स्तरीय तथा ग्राम पंचायत मेकुबा, सुभाषनगर, देवड़ा, मोढ़ा तेजमालता, छायण, खुईयाला एवं कोहरियों का गांव में परियोजना-स्तरीय स्थानों पर ‘रिफॉर्म उत्सव‘ की गतिविधियाँ आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।

अधाीक्षण अभियंता जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण जैसलमेर शरीफ मोहम्मद ने बताया कि मिट्टी को बचाना है तो पानी को सहेजना जरूरी है। वाटरशेड विकास का उदेश्य मिट्टी और पानी का संरक्षण कर जल-सुरक्षित गाँव, मजबूत खेती और समृद्ध किसान तैयार करना है।

सूखा प्रभावित और वर्षा आधारित क्षेत्रों में जहाँ पहले किसान एक भी फसल नहीं उगा पाते थे। वहाँ अब एक फसल ले पा रहे हैं और जहाँ पहले एक फसल होती थी, वहाँ अब दो या उससे अधिक फसलें ली जा रही है।

इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय और आजीविका के अवसर बढ़ रहे है।

देश में पिछले 12 वर्षो में लगभग 3.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत कवर किया गया है तथा पूरी हो चुकी परियोजनाओं के क्षेत्रों में भूजल स्तर से 3 मीटर तक वृद्धि, खेती के क्षेत्र में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी औैर दूध उत्पादन में 40 प्रतिशत तक वृद्धि जैसे परिणाम सामने आए है।

इन क्षेत्रों में किसानों की वार्षिक आय में कुछ स्थानों पर 70 प्रतिशत तक की वृद्धि भी दर्ज की गई है।

साथ ही उन्हांेने बताया किइसका व्यापक उदेश्य को वाटरशेड विकास को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे ‘जन आंदोलन‘ में परिवर्तित करना है, जिसमें समुदाय मिट्टी और जल कें संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

पिछले 12 वर्षो के दौरान वाटरशेड विकास कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए है, जिनमें प्रमुख हैंः 1.बेहतर प्रावधान - बेहतर परिणामः अब वाटरशेड विकास परियोजना के अंतर्गत हर हेक्टेयर पर पहले से अधिक राशि उपलब्ध है, ताकि मिट्टी, जलस्त्रोतों और खेतों, का बेहतर विकास किया जा सकें।

ऽमैदानी क्षेत्रों में राशि रू.12000 प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर रू.22000 की गई है।

ऽपहाडी एवं कठिन क्षेत्रों में राशि रू.15000 प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर रू.28000 की गई है।

इससे गांव में मिटटी और जल संरक्षण से जुड़े कार्य अधिक संख्या में और बेहतर तरीके से किए जा रहे है। जिसके कारण किसान, दूसरी या तीसरी फसल ले पा रहे हैं और उनकी आमदनी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।

2.जलद काम-जलद परिणाम- जल्दी मिलेगा लाभः अब वाटरशेड विकास परियोजनाओं को पूरा करने में कम समय लग रहा है। परियोजना की अवधि को 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष किया गया है।

इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा हैः मिट्टी और जल संरक्षण के काम जल्दी पूरे हो रहे है।

खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है। मिट्टी का कटाव कम हुआ है और भूमि की उत्पादकता बढ़ी है।

किसानों और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ी है और उनके जीवन में समृद्धि, खुशहाली आई है।

3.उत्रत कृषि उपकरण, गुणवतापूर्ण बीज एवं पौधों के माध्यम से किसानो की आय में वृद्धिः जल की बेहतर उपलब्धता, मृदा नमी में वृद्धि तथा क्षरित भूमि के पुनरूद्वार से कृषि उत्पादकता में सुधार की मजबूत आधारशिला तैयार होती है।

इन लाभों को खेत स्तर तक पहुँचाने के लिए वाटरशेड परियोजना क्षेत्रों में गुणवतापूर्ण बीज,उत्रत कृषि उपकरण, फसल विविधीकरण, बागवानी, कृषि वानिकी तथा स्ािानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

4.वाटरशेड विकास को जन आंदोलन बनानाः समुदाय की व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा देश्व्यापी ‘‘वाटरशेड यात्रा‘‘ और ‘‘वाटरशेड महोत्सव‘‘ का आयोजन किया गया। इन पहलों ने जन भागीदारी के माध्सम से वाटरशेड विकास को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। इससे जल संरक्षण संरचनाओें के निर्माण के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव में भी समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।

रिफॉर्म को File से Life तक ले जाना राज्य के जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग ने जिला एवं परियोजना स्तर पर योजना को क्रियान्वित कर रहे फील्ड स्तर की मशीनरी को सक्रिय करने और ‘रिफॉर्म उत्सव‘ में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आहान किया है।

उल्लेखनीय हैं कि विकसित भारत @2047 के लिए सूखा-मुक्त भारत बनाने के लिए हम वाटरशेड सुधारों को हर गाँव तक पहुचा रहे हैं, हर समुदाय को जोड़ रहे है और ग्रामीण लोगों तक इनके वास्तविक लाभ पहुँचाना सुनिश्चित कर रहे है।