मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 28 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Headlines

विशेष संवाद: शिक्षा में AI अवसर है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकता – हितेश भट्ट

एम. बी. कॉलेज ऑफ कॉमर्स एवं श्री जी. एम. एन. लालजी आर्ट्स कॉलेज, देहगाम, गांधीनगर के प्राचार्य हितेश भट्ट से डॉ. प्रेरणा गौड़ की विशेष बातचीत

एम. बी. कॉलेज ऑफ कॉमर्स एवं श्री जी. एम.

मुख्य बिंदु
  • प्रश्न 1: प्राचार्य बनने तक का आपका सफर कैसा रहा?
  • उत्तर: मेरा प्राचार्य बनने तक का सफर निरंतर सीखने, अनुभव प्राप्त करने और जिम्मेदारियां निभाने का सफर रहा है।
  • शिक्षक के रूप में मेरी प्राथमिकता हमेशा विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा रही है।
  • समय के साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए मुझे संस्थान की कार्यप्रणाली को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।
  • मेरे लिए प्राचार्य बनना केवल एक पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना है।
  • मेरा मानना है कि प्राचार्य को शिक्षक, प्रशासक और मार्गदर्शक—तीनों भूमिकाओं में संतुलन बनाकर कार्य करना चाहिए।
WAf𝕏TGin✉🖨
विशेष संवाद: शिक्षा में AI अवसर है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकता – हितेश भट्ट

प्रश्न 1: प्राचार्य बनने तक का आपका सफर कैसा रहा?

उत्तर: मेरा प्राचार्य बनने तक का सफर निरंतर सीखने, अनुभव प्राप्त करने और जिम्मेदारियां निभाने का सफर रहा है। शिक्षक के रूप में मेरी प्राथमिकता हमेशा विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा रही है। समय के साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्व निभाते हुए मुझे संस्थान की कार्यप्रणाली को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।

मेरे लिए प्राचार्य बनना केवल एक पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना है। मेरा मानना है कि प्राचार्य को शिक्षक, प्रशासक और मार्गदर्शक—तीनों भूमिकाओं में संतुलन बनाकर कार्य करना चाहिए।

प्रश्न 2: विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षकों की भूमिका कैसी होनी चाहिए?

उत्तर: शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के भीतर सीखने की जिज्ञासा जगाने वाला मार्गदर्शक होना चाहिए। आज के विद्यार्थियों को केवल किताबों से जोड़ने के बजाय विषय को व्यावहारिक जीवन, तकनीक और वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना आवश्यक है।

शिक्षक यदि अपने विषय के प्रति उत्साह, संवेदनशीलता और नवीन शिक्षण पद्धतियों का प्रयोग करें, तो विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए प्रेरित होंगे।

मेरा मानना है कि एक अच्छा शिक्षक ज्ञान देता है, लेकिन एक महान शिक्षक सीखने की इच्छा पैदा करता है।

प्रश्न 3: वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

उत्तर: मेरे विचार से आज उच्च शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बदलती हुई दुनिया की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना है।

आज केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों में विषय-ज्ञान के साथ-साथ तार्किक चिंतन, संवाद कौशल, रचनात्मकता, रोजगारपरक दक्षता और नैतिक मूल्यों का विकास करना आवश्यक है। साथ ही, विद्यार्थियों को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग के लिए तैयार करना भी उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

प्रश्न 4: तकनीकी और AI के बढ़ते प्रभाव को आप शिक्षा के लिए अवसर मानते हैं या चुनौती?

उत्तर: मैं इसे मुख्य रूप से एक बड़ा अवसर मानता हूं, हालांकि इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। AI शिक्षक का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि शिक्षक की क्षमता को बढ़ाने के लिए उपयोगी होना चाहिए।

AI के माध्यम से व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा, शोध, विषय-वस्तु निर्माण, डेटा विश्लेषण और विद्यार्थियों की सीखने संबंधी आवश्यकताओं को समझने में काफी सहायता मिल सकती है।

लेकिन इसके साथ नैतिक उपयोग, मौलिकता, तार्किक चिंतन और मानवीय मूल्यों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

मेरा मानना है कि AI शिक्षा को बदल सकता है, लेकिन शिक्षा में मानवीय संवेदना का स्थान नहीं ले सकता।

प्रश्न 5: आने वाले वर्षों में आप अपने महाविद्यालय को किस रूप में देखना चाहते हैं?

उत्तर: मैं अपने महाविद्यालय को एक ऐसे आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी-केंद्रित उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में देखना चाहता हूं, जहां शिक्षा केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित न हो।

मैं चाहता हूं कि हमारा महाविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ शोध, नवाचार, कौशल विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों, खेलकूद और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए।

हमारा उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थी यह महसूस करें कि यह केवल उनका कॉलेज नहीं, बल्कि उनके सपनों को आकार देने वाला संस्थान है।

प्रश्न 6: आपका पसंदीदा लेखक कौन है और उनकी रचनाओं से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर: मेरे पसंदीदा लेखकों में मुंशी प्रेमचंद का विशेष स्थान है। उनकी रचनाओं में समाज, मानवीय संवेदनाएं, संघर्ष और जीवन की वास्तविकताएं बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखाई देती हैं।

उनका साहित्य हमें केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समाज और मनुष्य को समझने के लिए प्रेरित करता है। इसके साथ ही हिंदी और भारतीय साहित्य के अनेक रचनाकारों से भी मुझे प्रेरणा मिलती रही है।

प्रश्न 7: साहित्य सृजन की ओर आप कैसे उन्मुख हुए?

उत्तर: साहित्य की ओर मेरा आकर्षण जीवन और समाज को संवेदनशील दृष्टि से देखने की प्रक्रिया से विकसित हुआ। शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के साथ संवाद, सामाजिक परिवेश, मानवीय संबंध और जीवन के विभिन्न अनुभवों ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया।

मेरे लिए साहित्य केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि भावनाओं, विचारों और अनुभवों को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। जब कोई अनुभव मन को गहराई से स्पर्श करता है, तो वह शब्दों का रूप लेने लगता है।

प्रश्न 8: विद्यार्थियों को सफलता के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: मैं विद्यार्थियों से कहना चाहूंगा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच सफलता की सबसे मजबूत नींव हैं।

असफलता से कभी निराश न हों, क्योंकि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर है। अपने समय का सदुपयोग करें, नई चीजें सीखें, तकनीक का सकारात्मक उपयोग करें और अपने भीतर मानवीय मूल्यों को हमेशा जीवित रखें।

अंत में मैं विद्यार्थियों से केवल इतना कहना चाहूंगा—

“बड़े सपने देखिए, उन्हें पाने के लिए ईमानदारी से मेहनत कीजिए और अपनी सफलता को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाइए।”