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सीटीएई, एमपीयूएटी में 11वाँ आयुर्वेद दिवस पर औषधीय पौधों औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती एवं मूल्य संवर्धन पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के AICRP औषधीय एवं सगंधीय पौधे एवं बीज (M&AP&B) केंद्र तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त

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सीटीएई, एमपीयूएटी में 11वाँ आयुर्वेद दिवस पर औषधीय पौधों औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती एवं मूल्य संवर्धन पर विशेषज्ञों ने दिया जोर


उदयपुर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के AICRP औषधीय एवं सगंधीय पौधे एवं बीज (M&AP&B) केंद्र तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (सीटीएई), उदयपुर में कल बुधवार को 11वाँ आयुर्वेद दिवस मनाया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुनील खंडेलवाल, सेवानिवृत्त संकाय सदस्य, एमपीयूएटी, ने आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं अनुसंधान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों के वैज्ञानिक संरक्षण एवं उपयोग से आयुर्वेद की प्रासंगिकता को और अधिक व्यापक बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में प्रो. दीपक राजपुरोहित, फाइटोकेमिस्ट, AICRP M&AP&B, एमपीयूएटी ने औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, सतत उपयोग, मूल्य संवर्धन तथा उद्यमिता की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से मेवाड़ के जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए इनके माध्यम से ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के लिए आय के नए अवसर विकसित किए जाने की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर डॉ. नरेंद्र कुमार पाडिवाल, तकनीकी सहायक, ने विभिन्न औषधीय पौधों का जीवंत प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को पौधों की पहचान, औषधीय उपयोगिता तथा उनकी वैज्ञानिक खेती से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

डॉ. नरोत्तम सोनी, सहायक शिक्षण सहयोगी, प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विभाग, सीटीएई, ने औषधीय पादप संसाधनों के संरक्षण, प्रसंस्करण एवं सतत उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने औषधीय पौधों से प्राप्त उत्पादों में मूल्य संवर्धन तथा प्रसंस्करण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं विश्वविद्यालय के कर्मचारियों सहित कुल 55 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उनके संरक्षण एवं वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का संदेश दिया गया।