उदयपुर। 23 सितंबर को विद्या भवन ऑडिटोरियम में प्रस्तावित रमा मेहता स्मृति व्याख्यान में जेएनयू की सेवानिवृत्त विवादित प्रोफेसर निवेदिता मेनन को मुख्य वक्ता बनाए जाने का सर्वसमाज की ओर से विरोध किया गया है।सर्व समाज के संगठन के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने बताया कि निवेदिता मेनन के द्वारा कई बार ऐसे अनर्गल, समाज में साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले एवं देश विरोधी बयान सामने आए हैं, जिनको लेकर देशभर में विवाद हुआ।
ऐसे में उदयपुर जैसे शांतिप्रिय और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शहर में ऐसे वक्ता के कार्यक्रम को लेकर सर्वसमाज का विरोध है।रमा मेहता ट्रस्ट और सेवा मंदिर से जुड़े कार्यक्रम पर सवाल डॉ दुलावत ने बताया की यह कार्यक्रम रमा मेहता ट्रस्ट के द्वारा आयोजित किया जा रहा है इनके ट्रस्टियों एवं पदाधिकारियों का संबंध उदयपुर की विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं से है, अजय सिंह मेहता, हेमराज भाटी एवं अन्य ट्रस्टी विद्या भवन सोसायटी एवं सेवा मंदिर में प्रमुख है।
इस प्रकार के संस्थागत संबंधों को देखते हुए कार्यक्रम के आयोजकों की जवाबदेही और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि शहर में होने वाले ऐसे कार्यक्रमों में किस प्रकार के वक्ताओं को मंच दिया जा रहा है जो कि देश विरोधी सोच रखते है उदयपुर की जनता ऐसे वक्ता को बर्दाश्त नहीं करेगी।कश्मीर को लेकर विवादित बयान वर्ष 2016 में निवेदिता मेनन के कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर देशभर में विवाद हुआ था।
उसके बयान में भारत द्वारा कश्मीर पर “अवैध कब्जे” की बात कही गई थी। इसी बयान को लेकर उनके विरुद्ध पुलिस शिकायत भी दर्ज हुई थी।
सर्वसमाज संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि कश्मीर जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषय पर इस प्रकार की टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को उदयपुर में मंच देने से पहले आयोजकों को विचार करना चाहिए।हिंदू समाज को लेकर टिप्पणी पर भी सवाल निवेदिता मेनन के एक अन्य व्याख्यान में हिंदू समाज को लेकर की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मेनन ने हिंदू समाज को दुनिया के सबसे हिंसक समाजों में से एक बताते हुए इसकी जड़ों में हिंसा होने की बात कही थी।भारतीय सेना और सैनिकों को भी नहीं छोड़ा मेनन ने वर्ष 2017 में जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में नदिता मेनन के व्याख्यान को लेकर भी विवाद हुआ था।
भारतीय सैनिकों के देश के लिए नहीं बल्कि आजीविका के लिए काम करने की बात सामने आई थी। इसी कार्यक्रम से जुड़े विवाद में कश्मीर, सियाचिन और भारतीय सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे।
इस मामले को लेकर पुलिस शिकायत दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर भी कार्रवाई हुई थी।2026 में “भारत एक मनहूस देश” टिप्पणी वर्ष 2026 में निवेदिता मेनन की भारत के संदर्भ में भारत को मनहूस देश कहना एवं “इस मनहूस देश में मुसलमान थोड़ी सांस ले पाए” वाली टिप्पणी भी विवाद का विषय बनी।पदाधिकारियों ने कहाँ की वह भारत में रहती है और भारत के ही विश्वविधालय में काम कर अपनी जीवन गुजरा लेकिन उसने काम भारत के विरोध में किया इस तरह का बयान देश के प्रति गद्दार साबित करता हैमुस्लिम पुरुषों को लेकर टिप्पणी पर भी विरोध हाल ही में एक पॉडकास्ट में हिंदू लड़कियों के मुस्लिम पुरुषों को पसंद करने एवं मुस्लिम पुरुषों के आकर्षक होने की बात कही और इसे अपने ही हिन्दू धर्म में आकर्षण नहीं मिलने से जोड़ा।सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने कहा की ऐसे बयान समाज में नफरत पैदा करते है ऐसे लोगो द्वारा ही समाज को बाटने का काम किया जाता है।स्वरा भास्कर के जौहर संबंधी बयान का भी उल्लेख इन्हीं के विचार से जुडी कथित अभिनेत्री स्वरा भास्कर के पद्मावत फिल्म के जौहर दृश्य पर रानी पद्मावती के लिए आपतिजनक शब्द कहे गए उन्हें कायर कहा गया।ऐसे विचार को उदयपुर में मंच दिए जाने से पहले आयोजकों को शहर की सामाजिक एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।मेवाड़ वीरता और शौर्य की भूमि है यहाँ रानी पद्मावती समस्त मेवाड़ वासियों और देश के लिए पूजनीय है और सभी की उनमें आस्था है।कार्यक्रम निरस्त करने की मांग डॉ. परमवीर सिंह दुलावत एवं सर्व संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे लोग एवं ऐसी संस्थाएं समाज में सांप्रदायिकता, वैमनस्यता फैलाते है, भारत विरोधी सोच वाले व्यक्ति मेवाड़ की धरती पर नहीं आये तो ही बेहतर है, कार्यक्रम को निरस्त करना है साथ ही आयोजकों से स्पष्टिकर भी प्रशाशन मांगे की की किस प्रयोजन से इस तरह की गतिविधियाँ करवाई जा रही है।
यह मामला केवल कार्यक्रम निरस्त या निवेदिता मेनन की उदयपुर ना आने पर शांत नहीं होगा अब इन रमा मेहता ट्रस्ट, सेवा मंदिर एवं विधा भवन के ट्रस्टी जो इनमें सम्मिलित है उन्हें स्पष्टीकरण भी देना होगा की आखिर क्यों इस तरह की देश विरोधी गतिविधियाँ उदयपुर में की जा रही है और करवाई जा रही है।मेवाड़ अपनी शांति, समानता और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है।
लेकिन समाज को तोड़ने वाले और देशविरोधियों को जवाब देना भी अच्छे से जानता है अगर यह कार्यक्रम होता है या ऐसे देश विरोधी लोग मेवाड़ की धरती पर आते है तो सर्व समाज का आक्रोश और अपमान का जवाब पूरा मेवाड़ ही नहीं पूरा देश उग्र आन्दोलन के माध्यम से देखेगा।
