अक्सर गलत तरीके से बैठने या खड़े रहने से रीढ़ की हड्डी और कंधों में होने वाले दर्द से राहत दिलाने के लिए उदयपुर के एक होनहार छात्र ने अभिनव नवाचार किया है।
विद्यालय के मीडिया प्रभारी विकास साहू ने बताया कि सेंट एंथनीज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (उदयपुर) में कक्षा 12 के छात्र रुद्राक्ष माथुर ने एक विशेष शारीरिक मुद्रा सुधारने वाली बेल्ट' (पोस्चर करेक्टिंग बेल्ट) तैयार की है।
इस नवाचार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF) - भारत द्वारा आयोजित 12वीं राष्ट्र स्तरीय प्रदर्शनी एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता इंस्पायर-मानक (12-14 अक्टूबर, नई दिल्ली) में प्रदर्शित किया।
क्या है तकनीक और कैसे करती है काम? मार्गदर्शक शिक्षक हिमांशु पंचोली के निर्देशन में तैयार की गई इस बेल्ट में तीन मजबूत नायलॉन पट्टियों का उपयोग किया गया है, जो नट और बोल्ट की मदद से एक केंद्रीय आवरण (सेंट्रल कवर) से जुड़ी हैं।
सफलता पर विद्यालय के प्रधानाचार्य विलियम डिसूजा ने बधाई दी। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय की सूची में एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई।
बनावट: दो पट्टियाँ उपयोगकर्ता के कंधों के ऊपर से गुजरती हैं, जबकि तीसरी पट्टी रीढ़ की हड्डी के साथ नीचे जाकर कमर की बेल्ट से जुड़कर इसे स्थिरता प्रदान करती है।
स्मार्ट अलार्म सिस्टम: बेल्ट के केंद्रीय आवरण में पैरेलल इलेक्ट्रिक सर्किट से जुड़ा एक ध्वनि चेतावनी उपकरण (बजर) लगा है। कार्यप्रणाली: जैसे ही व्यक्ति गलत मुद्रा (झुककर) में बैठता या खड़ा होता है, बेल्ट पर खिंचाव पड़ता है, जिससे आंतरिक स्विच सक्रिय हो जाता है।
सर्किट पूरा होते ही बीप/बजर की आवाज बजने लगती है, जो तुरंत उपयोगकर्ता को अपनी मुद्रा सही करने का संकेत देती है।
लंबे समय में सुधारेगी बैठने-खड़े होने की आदत छात्र रुद्राक्ष माथुर ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में घंटों कंप्यूटर और मोबाइल के सामने गलत तरीके से बैठने से युवाओं व बच्चों में रीढ़ की हड्डी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
यह उपकरण व्यक्ति को समय-समय पर सतर्क कर सही शारीरिक मुद्रा बनाए रखने में मदद करता है, जिससे भविष्य में रीढ़ की हड्डी और कमर से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले इस प्रोजेक्ट को प्रदर्शनी में सराहा गया है।
