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Udaipur News

बाल विवाह रोकथाम और जीवन कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

चाइल्डफंड इंडिया की दो दिवसीय कार्यशाला में बाल अधिकार, कानूनी प्रावधानों और उच्च शिक्षा पर हुई चर्चा

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बाल विवाह रोकथाम और जीवन कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

उदयपुर। चाइल्डफंड इंडिया की ओर से उदयपुर जिले के गोगुंदा, झाड़ोल, फलासिया एवं कोटड़ा क्षेत्र के 50 गांवों में किशोरों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

इनका उद्देश्य जीवन कौशल एवं नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने, बाल संरक्षण, बाल विवाह की रोकथाम तथा उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करना है।

इसी क्रम में 9 अक्टूबर को उदयपुर के होटल आकाशीय इन में 21वीं सदी के जीवन कौशल विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

इसमें 35 स्टाफ सदस्यों को जीवन कौशल का प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे गांवों में किशोरों एवं युवाओं के साथ बेहतर तरीके से कार्य कर सकें और उन्हें जागरूक करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।कार्यक्रम में बाल अधिकारिता विभाग के उप निदेशक गौरव सरस्वत ने बाल अधिकारों एवं बाल विवाह रोकथाम से जुड़े विषयों पर जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि जीवन कौशल युवाओं और किशोरों को समय पर अपनी आवाज उठाने तथा समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करने की सीख देता है।

इसके साथ ही समुदाय और पंचायतों में युवाओं एवं किशोरों का उच्च और आधुनिक शिक्षा से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश राहुल चौधरी ने बाल विवाह और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।

उन्होंने बाल विवाह रोकथाम को लेकर सभी को शपथ दिलाई।

साथ ही गांवों से आए प्रतिभागियों को संबंधित विधिक सेवाओं और उपलब्ध संसाधनों के बारे में भी बताया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अधिवक्ता यशस्वी शर्मा ने बालिकाओं एवं महिलाओं के सशक्तीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जीवन कौशल प्रशिक्षण के सत्रों में दी गई जानकारी को सही तरीके से व्यवहार में अपनाया जाए, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100, संबंधित कानूनों तथा शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के विधि सहायक संतोष मेनारिया ने भी कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया।

उन्होंने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि धरातल पर होने वाले बाल विवाह की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना जरूरी है।

इसके साथ ही दंड के प्रावधानों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समय पर सूचना देना भी आवश्यक है।चाइल्डफंड इंडिया के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी राजेश शर्मा ने गोगुंदा, झाड़ोल, फलासिया एवं कोटड़ा क्षेत्र के गांवों में किशोरों एवं युवाओं के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि संस्था की ओर से शिक्षा, जीवन कौशल, बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में गोगुंदा क्षेत्र के 38 गांवों में युवाओं के समूह गठित किए जा चुके हैं।

इन समूहों के माध्यम से जीवन कौशल प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा और राजकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ युवाओं को विभिन्न अवसरों से जोड़ने के लिए जागरूक किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि आगामी समय में बाल विवाह रोकथाम के लिए टास्क टीम का गठन किया जाएगा।

इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके और इस अभियान को सफल बनाया जा सके।चाइल्डफंड इंडिया के फोकल पॉइंट पर्सन एवं कार्यक्रम अधिकारी आशीष चौधरी ने प्रशिक्षण की रूपरेखा तथा आगामी कार्ययोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित प्रतिभागियों के माध्यम से गांवों में किशोरों एवं युवाओं को जागरूक किया जाएगा।

उन्हें शिक्षा जारी रखने, कौशल विकसित करने और अपने भविष्य के लिए सकारात्मक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रतिभागियों एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं ने न्यायाधीश राहुल चौधरी के नेतृत्व में बाल विवाह रोकने और समाज को बाल विवाह मुक्त बनाने की शपथ ली।