उदयपुर। जीआर फिनमार्ट की ओर से प्रस्तुत ‘कवियों का करवा’ काव्य संध्या का आयोजन रविवार को सुखाड़िया रंगमंच, नगर निगम टाउन हॉल में किया गया। शब्दों के संगम और भावनाओं के उत्सव से सजी इस काव्य संध्या में देशभक्ति, वीर रस, हास्य-व्यंग्य, नारी शक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
कार्यक्रम में विनीत चौहान, प्रताप फौजदार, सर्वेश अस्थाना, राव अजातशत्रु, खुशबू शर्मा, सुनील व्यास, अजय अंजाम और अतुल ज्वाला ने अपनी-अपनी विशिष्ट शैली में काव्य पाठ किया। कभी वीर रस की ओजपूर्ण पंक्तियों ने माहौल में जोश भरा तो कभी हास्य-व्यंग्य की रचनाओं पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
महाराणा प्रताप के शौर्य ने जगाया स्वाभिमान अजय अंजाम ने महाराणा प्रताप के शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण को अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियां— “उस नर नाहर ने मातृभूमि का पूरा कर्ज उतारा था, राणा प्रताप मेवाड़ गगन पर चमका एक सितारा था”—ने श्रोताओं में देशभक्ति का भाव भर दिया।
वहीं अतुल ज्वाला ने राजस्थान की वीरभूमि, महाराणा प्रताप के स्वाभिमान और चेतक की स्वामिभक्ति को कविता में पिरोते हुए कहा— “खुद्दारी से जीना हमको राजस्थान सिखाता है।” उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जोरदार तालियों से उत्साह बढ़ाया।
हास्य-व्यंग्य ने खूब गुदगुदाया सर्वेश अस्थाना ने अपनी चुटीली और धारदार व्यंग्य रचनाओं से सामाजिक एवं राजनीतिक विसंगतियों पर कटाक्ष किया। “रंग बदलने के मामले में, नेता गिरगिट का बाप है” जैसी व्यंग्यात्मक पंक्तियों ने सभागार में खूब ठहाके लगाए।
बेटियों की शक्ति को कविता में दिया स्वर खुशबू शर्मा ने नारी शक्ति पर प्रभावशाली कविता प्रस्तुत करते हुए बेटियों के साहस और सामर्थ्य को रेखांकित किया। उनकी पंक्तियां— “सिर्फ अबला ना समझ बेटी को, वक्त पे दुर्गा बन भी सकती है”—ने श्रोताओं को भावुक भी किया और बेटियों के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया।
सुनील व्यास ने गांव, मिट्टी और जमीन से जुड़े जीवन की संवेदनाओं को अपनी कविता में उतारा। “जमीन से जुड़े लोग ही आकाश की परिभाषा होते हैं” जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को जीवन की जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में अन्य कवियों विनीत चौहान, प्रताप फौजदार और राव अजातशत्रु ने भी अपनी रचनाओं से काव्य संध्या को यादगार बनाया। अलग-अलग रस और अंदाज की कविताओं से सजी इस शाम में श्रोता कभी भावविभोर हुए तो कभी ठहाकों से सभागार गूंज उठा। पूरे कार्यक्रम के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन होता रहा।कवि सम्मेलन का संचालन उदयपुर के राष्ट्रीय कवि राव अजात शत्रु ने किया.