उदयपुर, महाराणा मेवाड़ विद्या मंदिर, अंबामाता, उदयपुर में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे’ कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था— “अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाएँ, अपनी सुरक्षा के लिए दृढ़ रहें—शिक्षा के मंदिर में कोई भी बच्चा असुरक्षित नहीं होना चाहिए।”
सत्र में श्री गणपत लाल विश्नोई, न्यायाधीश, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), न्यायालय क्रमांक-1, उदयपुर ने विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा असुरक्षित परिस्थितियों में निर्भीक होकर आवाज़ उठाने के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने तथा सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त विद्यालयी वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे किसी भी अनुचित या असहज परिस्थिति को अनदेखा न करें, बल्कि अपने विश्वासपात्र शिक्षकों, अभिभावकों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों को इसकी जानकारी दें। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सजगता और अपने अधिकारों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के मानद निदेशक सतीश कुमार शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन तथा प्रधानाध्यापिका सुश्री शानू जैन के निर्देशन में किया गया।
समापन अवसर पर प्रधानाध्यापिका शानू जैन ने न्यायाधीश विश्नोई के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी विचारों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना विद्यालय, अभिभावकों एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह सशक्त संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने, सम्मान के साथ जीवन जीने तथा अपने अधिकारों के लिए निर्भीक होकर आवाज़ उठाने का अधिकार है।
