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महाशीर संरक्षण रिजर्व के अपस्ट्रीम और प्रभाव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां रोकने की मांग

इको टोन पार्क में कैफेटेरिया का प्रस्ताव बड़ी झील की पारिस्थितिकी के विरुद्ध

मुख्य बिंदु
  • बड़ी झील को ‘इको सेक्रेड’ यानी पर्यावरणीय पवित्र झील घोषित किया जाए उदयपुर, बड़ी झील (बड़ी तालाब) के इको टोन पार्क में कैफेटेरिया खोलने का प्रस्ताव झील की पारिस्थितिकी, महाशीर मछली के संरक्षण और जल सुरक्षा की दृष्टि से अनुचित है।
  • वन विभाग का दायित्व प्राकृतिक आवासों, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण करना है।
  • ऐसे में विभाग द्वारा विकसित पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र में ही व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने का प्रस्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है।
  • यह विचार रविवार को बारी घाट पर आयोजित झील संवाद में व्यक्त किए गए।
  • संवाद से पूर्व स्वच्छता श्रमदान भी किया गया झील विशेषज्ञ एवं महाशीर संरक्षण रिजर्व मॉनिटरिंग कमिटी के सदस्य डॉ.
  • अनिल मेहता ने कहा कि बड़ी झील केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता की धरोहर और उदयपुर की जल सुरक्षा से जुड़ा प्राकृतिक संसाधन है।
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महाशीर संरक्षण रिजर्व के अपस्ट्रीम और प्रभाव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां रोकने की मांग
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बड़ी झील को ‘इको सेक्रेड’ यानी पर्यावरणीय पवित्र झील घोषित किया जाए उदयपुर, बड़ी झील (बड़ी तालाब) के इको टोन पार्क में कैफेटेरिया खोलने का प्रस्ताव झील की पारिस्थितिकी, महाशीर मछली के संरक्षण और जल सुरक्षा की दृष्टि से अनुचित है।

वन विभाग का दायित्व प्राकृतिक आवासों, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण करना है। ऐसे में विभाग द्वारा विकसित पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र में ही व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने का प्रस्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है।

यह विचार रविवार को बारी घाट पर आयोजित झील संवाद में व्यक्त किए गए।

संवाद से पूर्व स्वच्छता श्रमदान भी किया गया झील विशेषज्ञ एवं महाशीर संरक्षण रिजर्व मॉनिटरिंग कमिटी के सदस्य डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि बड़ी झील केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता की धरोहर और उदयपुर की जल सुरक्षा से जुड़ा प्राकृतिक संसाधन है।

इसे व्यावसायिक उपयोग के बजाय पारिस्थितिक संरक्षण की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। बड़ी झील को ‘इको सेक्रेड’ अर्थात ‘पर्यावरणीय पवित्र झील’ घोषित कर इसके प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी की रक्षा की जानी चाहिए।

डॉ. मेहता ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने 4 अप्रैल 2017 को महाशीर संरक्षण के संबंध में निर्देश दिए थे। बड़ी झील को महाशीर संरक्षण रिजर्व घोषित किए जाने के बाद यहां संरक्षण संबंधी दायित्व और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में झील के आसपास मानवीय दबाव बढ़ाने वाली नई गतिविधियों को अनुमति देने से पहले न्यायालयीन निर्देशों, संरक्षण संबंधी प्रावधानों और पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से परीक्षण आवश्यक है।

डॉ. मेहता ने कहा कि महाशीर जैसी संवेदनशील मछली का संरक्षण केवल झील के खुले जल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसके लिए प्राकृतिक आवास, जल गुणवत्ता, जल प्रवाह, प्रजनन स्थलों और अपस्ट्रीम जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा भी जरूरी है। इसलिए महाशीर संरक्षण रिजर्व के आसपास तथा बड़ी झील के अपस्ट्रीम और प्रभाव क्षेत्र में कैफेटेरिया सहित नई व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि कैफेटेरिया से खाद्य अपशिष्ट, प्लास्टिक, डिस्पोजेबल सामग्री और गंदे पानी के निस्तारण की समस्या बढ़ेगी।

इसके साथ शोर, कृत्रिम प्रकाश और वाहनों की आवाजाही से प्राकृतिक आवास पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इन गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषक वर्षाजल के साथ झील में पहुंचेंगे और जल गुणवत्ता और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि झीलों और वेटलैंड के जोन ऑफ इन्फ्लुएंस यानी प्रभाव क्षेत्र में ऐसी गतिविधिया पर्यावरण व पारिस्थितिक तंत्र को आघात पहुंचाती है।

सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि बड़ी झील को केवल पर्यटन और मनोरंजन के नजरिये से देखना उचित नहीं है। कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं पर्यटकों की संख्या और मानवीय गतिविधियों को बढ़ा सकती हैं। झील की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी गतिविधियों के बजाय झील संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शिक्षाविद कुशल रावल ने वन विभाग और प्रशासन से मांग की कि इको टोन पार्क में प्रस्तावित कैफेटेरिया पर पुनर्विचार किया जाए तथा महाशीर संरक्षण रिजर्व के आसपास और बड़ी झील के अपस्ट्रीम एवं प्रभाव क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार पर रोक लगाई जाए।

वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह और झील प्रेमी विनोद कुमावत ने कहा कि बड़ी झील की प्राकृतिक शांति, महाशीर का आवास और जैव विविधता सर्वोपरि हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी नई गतिविधि से संरक्षण प्रयास प्रभावित नहीं हों और न्यायालयीन निर्देशों के उद्देश्यों के विपरीत स्थिति उत्पन्न न हो।