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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना स्वस्थ समाज की पहली जरूरतः कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना स्वस्थ समाज की पहली जरूरतः कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत

जयपुर । राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने अपने भाषण में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने कहा कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक चुनौतियों के दौर में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भावनाओं को समझने और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने का आह्वान किया।उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों को छात्रों की मनस्थिति को समझने तथा उसे दूर करने की आवश्यकता पर जोर डाला।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हमें अपने आसपास का वातावरण हमेशा सकारात्मक बनाए रखना चाहिए। अगर हमसे कोई आकर के बात करें, तो हमें उसकी बात को सुनना व समझना चाहिए।

कई बार केवल किसी की बात सुन लेने से ही सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। हमें सकारात्मक सोच को जीवन का आधार बनाकर चलना चाहिए।

कक्षा में किताबों के अलावा भी अन्य विषयों पर बात करनी चाहिए और जब भी परेशानी हो तो हमें उसे पर खुलकर बोलना चाहिए।विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी नें कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों एवं समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े भ्रम एवं सामाजिक कलंक को दूर करने तथा जरूरत के समय मनोवैज्ञानिक सहायता लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना रहा।

उन्होंने कहा कि तनाव, चिंता और भावनात्मक चुनौतियों को लेकर समाज में खुलकर संवाद होना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी से जोड़कर देखने के बजाय इसे व्यक्ति के समग्र जीवन और कल्याण से जोड़ने की आवश्यकता है।इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि व पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनिका मोहन के द्वारा विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उन्होंने सकारात्मक जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमें हमेशा खुश रहने का प्रयास करना चाहिए।विशिष्टअतिथि व पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ए.वी.एस. मदनावत नें विद्यार्थियों से कहा कि हमें मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए।

हमें अच्छा भोजन व नियमित व्यायाम करना चाहिए। जिससे हमारा मन,मस्तिष्क अच्छे से काम कर सके।कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में डॉ. ज्योति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।इस अवसर पर प्रो. रामवतार शर्मा, डॉ. चन्द्राणी सेन, डॉ. तेजेंदर कौर, प्रो. रश्मि चौधरी, प्रो. उमा मित्तल, डॉ. आशिमा कट्टा, शालिनी खागारोत सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, एनसीसी कैडेट्स तथा यूनिवर्सिटी महारानी कॉलेज, यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज, यूनिवर्सिटी राजस्थान कॉलेज, यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज, सुबोध पीजी महिला महाविद्यालय, श्री भवानी निकेतन कॉलेज, कनोडिया महिला महाविद्यालय, जेवियर स्कूल, जेएनवी स्कूल पावटा से आए 250 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए मनोविज्ञान के ज्ञान को समाज के कल्याण से जोड़ने पर बल दिया।कार्यक्रम में पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, भाषण एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली, साइकोड्रामा का आयोजन किया गया।

विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों एवं रचनात्मक माध्यमों से और तैयार किए गए पोस्टरों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया व जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।जागरूकता रैली का कुलगुरु प्रो. सारस्वत, विभागाध्यक्ष प्रो. पुरी व अन्य अतिथि गणों के द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया।

जागरूकता रैली के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संदेश प्रसारित किए।