जयपुर । राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम के पैट्रन राजस्थान विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर बी. पी. सारस्वत रहे।
उनके संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस अभिविन्यास कार्यक्रम का उद्देश्य नवागंतुक विद्यार्थियों को मनोविज्ञान विषय, विभाग की गौरवशाली परंपराओं तथा इसके शैक्षणिक एवं व्यावहारिक महत्व से परिचित कराना था।विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभाग की समृद्ध शैक्षणिक विरासत, इसकी स्थापना एवं विकास में दिए गए योगदान तथा इससे जुड़ी प्रतिष्ठित शैक्षणिक विभूतियों से परिचित कराना था।
इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विभाग के प्रबुद्ध शिक्षाविदों के अनुभवों और उपलब्धियों से सीखने तथा प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया गया।विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने भी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रम की रूपरेखा से परिचित कराया।
उन्होंने मुख्य विषयों, वैकल्पिक विषयों, परियोजना कार्य, क्षेत्रकार्य, सामान्य मनोविज्ञान प्रयोगशाला तथा कौशल संवर्धन पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।
साथ ही, उन्होंने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव एवं कौशल विकास को समाहित करने वाली संतुलित शैक्षणिक व्यवस्था के महत्त्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम में विभाग के पूर्व संकाय सदस्यों एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविदों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभवों एवं विचारों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया तथा उनकी नई शैक्षणिक यात्रा के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
इन विशिष्ट शिक्षाविदों में डॉ. एस. सी. प्रसाद, डॉ. मूरजानी, प्रो. विजय लक्ष्मी चौहान, प्रो. मणिका मोहन सक्सेना, प्रो. ए. वी. एस. मदनावत, प्रो. उमा मित्तल शामिल रहे।प्रोफेसर एस. सी. प्रसाद ने अपने संबोधन में राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की स्थापना एवं उसके गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विभाग की शुरुआत, इसके विकास की यात्रा तथा अकादमिक एवं शोध के क्षेत्र में इसके योगदान को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को विभाग की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा से अवगत कराया।प्रोफेसर जानकी मूरजानी ने विभाग में प्रवेश लेने वाले नवागंतुक विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समर्पित भाव से प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।प्रोफेसर विजयलक्ष्मी चौहान ने मनोविज्ञान विभाग की गौरवशाली परंपरा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों और शैक्षणिक गरिमा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने ‘‘3एच-3एच’’ की अवधारणा को प्रस्तुत करते हुए बताया कि मस्तिष्क, हृदय और हाथ का समन्वय स्वास्थय, खुशी और सामंजस्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बौद्धिक विकास, भावनात्मक संवेदनशीलता और व्यावहारिक कौशल के संतुलित समन्वय से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थय, प्रसन्नता और सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सकता है।प्रोफेसर मणिका मोहन ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सकारात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि एक अच्छे मनोवैज्ञानिक बनने के लिए सत्यनिष्ठा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को एआई का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा समाज और राष्ट्रहित के विरुद्ध भ्रामक एवं नकारात्मक गतिविधियों से स्वयं को दूर रखने की सीख दी।प्रोफेसर उमा मित्तल ने विद्यार्थियों को मनोविज्ञान के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान का व्यावहारिक उपयोग व्यक्ति को स्वयं को बेहतर ढंग से समझने, अपनी भावनाओं को पहचानने तथा जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने में सहायता करता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक ज्ञान को केवल अकादमिक विषय तक सीमित न रखकर अपने व्यक्तिगत जीवन में भी लागू करने का संदेश दिया।वर्ष 1971 में स्थापित राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की शिक्षण, शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता की गौरवशाली परंपरा रही है।
पूर्व संकाय सदस्यों, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं नवप्रवेशित विद्यार्थियों के बीच संवाद ने विद्यार्थियों को विभाग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ने तथा मनोविज्ञान के क्षेत्र में इसके योगदान को समझने का अवसर प्रदान किया।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभाग के शैक्षणिक वातावरण, शोध सुविधाओं, विभिन्न गतिविधियों तथा विश्वविद्यालय के नियमों एवं विनियमों से भी परिचित कराया गया।
साथ ही, शैक्षणिक अनुशासन, बौद्धिक जिज्ञासा और शोध के प्रति रुचि विकसित करने पर बल दिया गया।कार्यक्रम का सफल समन्वय विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी, डॉ. ज्योति, शोधार्थियों तथा तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों द्वारा किया गया।
इस पहल ने विभाग की समृद्ध शैक्षणिक विरासत को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को अध्ययन एवं शोध के प्रति प्रेरित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
