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भगवान महावीर के जिन शासन में नहीं कोई भेदभाव, हर जीव को समान अधिकार और सम्मान:साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान महावीर के उपदेशों की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद समस

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान महावीर के उपदेशों की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद समस्त जीवों के कल्याण के लिए देशना दी। उनके जिन शासन में अमीर-गरीब, जाति और सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। यहां प्रत्येक जीव को समान अधिकार, सम्मान और मर्यादा प्राप्त है।

साध्वीश्री ने मां के वात्सल्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मां सदैव अपने पुत्र के कल्याण की कामना करती है। यदि उसकी दृष्टि व्यापक हो तो वह केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं की नहीं, बल्कि पुत्र की आत्मा के कल्याण और मोक्ष प्राप्ति की प्रार्थना करेगी। मनुष्य को भी क्षणिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने भगवान महावीर और गौतम स्वामी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार गौतम स्वामी ने भगवान महावीर से पूछा कि उन्हें केवलज्ञान कब प्राप्त होगा। इस पर प्रभु ने कहा कि जब वे उनसे अपना ध्यान हटा लेंगे, तब केवलज्ञान प्राप्त हो जाएगा। गौतम स्वामी ने उत्तर दिया कि यदि प्रभु से ध्यान हटाना पड़े तो ऐसा केवलज्ञान उन्हें स्वीकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी राह पर चलते समय गति से अधिक दिशा का महत्व होता है। सही दिशा में बढ़ाया गया कदम ही व्यक्ति को आत्मकल्याण के मार्ग तक पहुंचाता है। धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी और साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शुक्रवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान महावीर के उपदेशों की व्याख्या करते हुए कहा कि परमात्मा महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद समस्त जीवों के कल्याण के लिए देशना दी।

उनके जिन शासन में अमीर-गरीब, जाति और सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। यहां प्रत्येक जीव को समान अधिकार, सम्मान और मर्यादा प्राप्त है।साध्वीश्री ने मां के वात्सल्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मां सदैव अपने पुत्र के कल्याण की कामना करती है।

यदि उसकी दृष्टि व्यापक हो तो वह केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं की नहीं, बल्कि पुत्र की आत्मा के कल्याण और मोक्ष प्राप्ति की प्रार्थना करेगी।

मनुष्य को भी क्षणिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने भगवान महावीर और गौतम स्वामी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार गौतम स्वामी ने भगवान महावीर से पूछा कि उन्हें केवलज्ञान कब प्राप्त होगा।

इस पर प्रभु ने कहा कि जब वे उनसे अपना ध्यान हटा लेंगे, तब केवलज्ञान प्राप्त हो जाएगा।

गौतम स्वामी ने उत्तर दिया कि यदि प्रभु से ध्यान हटाना पड़े तो ऐसा केवलज्ञान उन्हें स्वीकार नहीं है।उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी राह पर चलते समय गति से अधिक दिशा का महत्व होता है।

सही दिशा में बढ़ाया गया कदम ही व्यक्ति को आत्मकल्याण के मार्ग तक पहुंचाता है। धर्मसभा में साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी और साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।