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18 साल का दर्द खत्म, गीतांजली हॉस्पिटल में महिला के पेट से निकली 8 किलो की विशाल गांठ

उदयपुर। भीलवाड़ा निवासी 44 वर्षीय महिला पिछले करीब 18 वर्षों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और रुक-रुक कर होने वाले पेट दर्द की समस्या से परेशान थी।

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18 साल का दर्द खत्म, गीतांजली हॉस्पिटल में महिला के पेट से निकली 8 किलो की विशाल गांठ

उदयपुर। भीलवाड़ा निवासी 44 वर्षीय महिला पिछले करीब 18 वर्षों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और रुक-रुक कर होने वाले पेट दर्द की समस्या से परेशान थी।

लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के कारण महिला को दैनिक जीवन में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शुरुआत में महिला ने इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन समय के साथ तकलीफ बढ़ती गई।

आखिरकार परिजनों की सलाह पर महिला को उपचार के लिए गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर लाया गया।

अस्पताल में आवश्यक जांच एवं परीक्षण के बाद सामने आया कि महिला के गर्भाशय में करीब 40×40 सेंटीमीटर आकार का विशाल फाइब्रॉइड विकसित हो चुका था। गांठ का आकार इतना बड़ा था कि पेट की जांच के दौरान लगभग पूरा पेट इसी विशाल द्रव्यमान से भरा हुआ महसूस हो रहा था। फाइब्रॉइड अनियमित आकार का था और इसमें कई बड़े-बड़े उभरे हुए हिस्से थे। इतने बड़े आकार और जटिल संरचना के कारण ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण माना गया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मरीज की स्थिति, गांठ के आकार और संभावित जोखिमों का विस्तृत आकलन किया। इसके बाद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। डॉ. मधुबाला चौहान के मार्गदर्शन में डॉ. नीलम तोषनिवाल एवं डॉ. दिव्या चौधरी ने 8 अगस्त 2026 को महिला का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। करीब 90 मिनट में पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।

ऑपरेशन के दौरान विशाल फाइब्रॉइड के साथ गर्भाशय को भी निकालना पड़ा। सर्जरी के बाद निकाले गए गर्भाशय एवं फाइब्रॉइड का कुल वजन करीब 8 किलोग्राम पाया गया। इतने बड़े आकार की गांठ को सफलतापूर्वक निकालना चिकित्सकीय दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी।

ऑपरेशन के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर कम होने पर एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अक्षय, डॉ. पूर्वा एवं उनकी टीम ने स्थिति को कुशलतापूर्वक संभाला। एनेस्थीसिया टीम द्वारा मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई और आवश्यक चिकित्सा प्रबंधन किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को करीब एक दिन आईसीयू में निगरानी में रखा गया। मरीज को उपचार के दौरान 3 यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया।

चिकित्सकों के अनुसार इतने बड़े आकार के फाइब्रॉइड का ऑपरेशन सामान्य मामलों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

इसमें गांठ के कारण आसपास के अंगों पर पड़ने वाले दबाव, ऑपरेशन के दौरान संभावित अधिक रक्तस्राव तथा मरीज की एनेस्थीसिया संबंधी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।

ऐसे मामलों में सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ओटी स्टाफ और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर टीम के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इस जटिल एवं सफल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम, ओटी स्टाफ, आईसीयू टीम एवं मैटरनिटी विभाग की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चिकित्सकों ने बताया कि महिलाओं में लंबे समय तक अत्यधिक मासिक रक्तस्राव, लगातार या बार-बार पेट दर्द तथा पेट के आकार में असामान्य वृद्धि जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार से ऐसी जटिलताओं की पहचान एवं उचित प्रबंधन किया जा सकता है।