कोटा। साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही को चुरु की संस्था हिंदी साहित्य संसद्, द्वारा साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का ' जनकवि प्रदीप शर्मा साहित्य सम्मान एवं पुरस्कार' प्रदान किया जाएगा।
संस्था के अध्यक्ष बनवारी लाल ख़ामोश ने बताया कि आगामी हिंदी दिवस 14 सितंबर को चूरू में आयोजित समारोह में निर्मोही को पुरस्कार स्वरूप ₹ 11000/- नकद राशि, श्री फल, शाल,स्वर्ण पदक, सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया जाएगा।
साहित्यिक योगदान : निर्मोही ने हिंदी और राजस्थानी साहित्य में अनुपम योगदान किया है। इनकी हिंदी भाषा में अब तक जंगल से गुज़रते हुए ( प्रकृति काव्य),धूप के साये में चाँदनी(काव्य संग्रह),मुरली बाज उठी अणघातां (आध्यात्मिक निबंध),उजाले अपनी यादों के ( संस्मरण),भोर पर चढ आयी धूप (काव्य), हाड़ौती अंचल का आधुनिक काव्य ( समीक्षा आलोचना),ना जा रे जोगिया ( उपन्यास), नीर की पीर (नाटक), तेरे चेहरे की तलाश ( कहानी संकलन ),विचार एवं संवाद ( आलेख),सफ़र दर सफ़र ( संस्मरण), एक बया और उसका घर ( बाल काव्य ), राजस्थानी कहानियां ः एक विवेचना ( समालोचना),द्रोपदी ( महाकाव्य ) कृतियां प्रकाशित हुई हैं।
राजस्थानी भाषा में काव्य, निबंध, उपन्यास, समीक्षा, संस्मरण, बाल काव्य संग्रह, खण्ड काव्य, कहानियां, आलेख, उपन्यास, बाल आत्मकथा तथा गीत-नव गीत पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।
पुरस्कार एवं सम्मान : स्वतंत्रता सैनानी नवनीत दास वैष्णव सम्मान, सहस्त्राब्दी सम्मान, नयी दिल्ली, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा 'कन्हैयालाल सहल पुरस्कार। भारतेंदु सम्मान, अक्षर सम्मान, विंध्यकोकिल भैयालाल सम्मान, छतरपुर(म.प्र.), पं. रतनलाल श्रेष्ठ साहित्यकार सम्मान, फलौदी, सृजन सेवा सम्मान, श्रीगंगानगर, उत्कर्ष मंच, नयी दिल्ली से ' लाईफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड आदि कई दर्जन पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं।
इनका जन्म 7 अप्रैल 1953 झालावाड़ जिले में हुआ। इन्होंने बी.एस.सी., हिंदी, राजस्थानी में एम.ए तक शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। सम्मान की घोषणा पर राजस्थान के अनेक साहित्यकारों ने इन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
