उदयपुर। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) प्रभारी डॉ. रमेश चंद्र बैरवा और उनकी टीम ने एक ५ महीने के अत्यंत गंभीर बच्चे को ' स्टैफिलोकोकस स्काल्डेड स्किन सिंड्रोम' स्टैफिलोकोकल स्केल्ड स्किन सिंड्रोम जैसी जानलेवा बीमारी से सफलतापूर्वक बचाकर नया जीवन दिया है।
क्या है स्टैफिलोकोकल स्केल्ड स्किन सिंड्रोम बीमारी और बच्चे की स्थिति?: यह एक बेहद दुर्लभ और गंभीर संक्रमण है, जिसमें मरीज की पूरी त्वचा किसी गंभीर बर्न (जलने) के मामले की तरह शरीर से उखड़ने और छिलने लगती है।
त्वचा के इस तरह पूरी तरह छिल जाने के कारण मासूम बच्चा असहनीय और अत्यधिक दर्द (severe pain) से तड़प रहा था। अस्पताल लाने पर बच्चे का ब्लड प्रेशर बेहद कम था और शरीर में अत्यधिक गंभीर इन्फेक्शन (सेप्टीसिमिया) फैल चुका था।
त्वचा पूरी तरह छिल जाने के कारण बच्चे के शरीर में सामान्य नस (Peripheral IV Cannula) ढूंढना और सुई लगाना भी नामुमकिन हो गया था। बच्चे की इस बेहद नाजुक और गंभीर स्थिति को देखते हुए उदयपुर के दो अन्य बड़े निजी अस्पतालों ने उसे भर्ती करने तक से मना कर दिया था।
वेंटिलेटर और मुश्किल इलाज से जीती जिंदगी: निराश माता-पिता जब बच्चे को लेकर गीतांजलि हॉस्पिटल पहुंचे, तो डॉ. रमेश चंद्र बैरवा ने बिना वक्त गंवाए उसे तुरंत पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में भर्ती किया।
सामान्य नस न मिलने के कारण जटिल स्थिति को देखते हुए डॉ. बैरवा ने खुद बड़ी ही कुशलता से बच्चे को सेंट्रल लाइन (Central Line) डाली। संक्रमण और दर्द इतना गंभीर था कि बच्चे को ३ दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।
डॉ. बैरवा और उनकी टीम की कड़ी मेहनत और सही एंटीबायोटिक दवाओं के सटीक तालमेल से धीरे-धीरे इन्फेक्शन पर काबू पाया गया और बच्चे की हालत में सुधार होने लगा।
परिजनों ने जताया आभार: डॉ. रमेश चंद्र बैरवा और गीतांजलि हॉस्पिटल की टीम के अथक प्रयासों से बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है। बच्चे को सकुशल देख माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने अस्पताल के प्रबंधन पर पूर्ण संतोष जताते हुए कहा, "इस मुश्किल घड़ी में डॉ. रमेश बैरवा और पूरे गीतांजलि परिवार ने न सिर्फ हमारे बच्चे की जान बचाई, बल्कि एक परिवार की तरह हमारे साथ खड़े रहे। हम उनके इस उपकार के लिए जीवनभर आभारी रहेंगे।"
