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गीतांजलि हॉस्पिटल में बाईं आंख की जटिल रेटिना सर्जरी सफल, मरीज की आंखों में लौटी रोशनी

उदयपुर। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के नेत्र रोग विभाग ने एक जटिल रेटिना सर्जरी कर दृष्टिहीनता से जूझ रही मरीज की दाईं आंख की रोशनी

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गीतांजलि हॉस्पिटल में बाईं आंख की जटिल रेटिना सर्जरी सफल, मरीज की आंखों में लौटी रोशनी

उदयपुर। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के नेत्र रोग विभाग ने एक जटिल रेटिना सर्जरी कर दृष्टिहीनता से जूझ रही मरीज की दाईं आंख की रोशनी में उल्लेखनीय सुधार लाने में सफलता हासिल की है।मरीज लक्ष्मण जी करीब 15 दिन पहले अपने बेटे के सहारे अस्पताल पहुँचे।

उनकी बाईं आंख में पुराने रेटिनल डिटैचमेंट और जटिल मोतियाबिंद के कारण पिछले 15 वर्षों से दृष्टि नहीं थी। वहीं, पिछले कुछ महीनों से उनकी दाईं आंख की रोशनी भी पूरी तरह चली गई थी।जांच के दौरान दाईं आंख में क्रॉनिक टोटल रेटिनल डिटैचमेंट पाया गया।

लंबे समय तक रेटिना अलग रहने के कारण वह काफी कठोर हो चुका था, जिससे सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई थी।

इसके अलावा, आंख में पहले से प्रत्यारोपित इंट्राऑक्युलर लेंस की स्थिति भी सामान्य नहीं थी।नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि मेहता के मार्गदर्शन में डॉ. प्रीति जैन एवं उनकी टीम ने दाईं आंख की स्क्लेरल बकलिंग, विट्रेक्टॉमी और सिलिकॉन ऑयल टैम्पोनेड तकनीक से सफल सर्जरी की।

इस दौरान रेटिना ओपीडी की नर्स सीता का भी सहयोग रहा।सर्जरी के 10 दिन बाद जब मरीज फॉलोअप के लिए अस्पताल पहुंचे, तो उनकी बाईं आंख की दृष्टि में उत्साहजनक सुधार देखने को मिला।

इस दौरान मरीज ने अपने चिकित्सक को पहचान लिया और उन्हें देखकर बेहद खुश हुए ।

चिकित्सक को पहचान पाने की उनकी खुशी इस सफल उपचार का सबसे भावुक और संतोषजनक पल बन गई।यह सफलता न केवल चिकित्सा टीम की विशेषज्ञता और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि लंबे समय से दृष्टि खो चुके मरीजों के लिए आधुनिक रेटिना सर्जरी की संभावनाओं को भी उजागर करती है।