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Udaipur News

कश्मीर की सुरम्य वादियों में शैक्षणिक भ्रमण कर लौटे महाराणा मेवाड़ विद्या मंदिर के 72 विद्यार्थी

प्रकृति, भौगोलिक विविधता, कृषि एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का मिला अवसर

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कश्मीर की सुरम्य वादियों में शैक्षणिक भ्रमण कर लौटे महाराणा मेवाड़ विद्या मंदिर के 72 विद्यार्थी

उदयपुर। ज्ञान, रोमांच, मनोरंजन और अविस्मरणीय अनुभवों से परिपूर्ण जम्मू-कश्मीर का शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न कर महाराणा मेवाड़ विद्या मंदिर, उदयपुर के 72 विद्यार्थी सकुशल लौट आए। इस भ्रमण दल में विद्यालय के 7 शिक्षक एवं 2 सहयोगी कर्मचारी भी सम्मिलित थे। संपूर्ण यात्रा विद्यालय के मानद निदेशक सतीश कुमार शर्मा के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशन में आयोजित की गई।

विद्यालय के मानद निदेशक ने बताया कि इस शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर प्रकृति, पर्यावरण, भौगोलिक परिस्थितियों, कृषि, इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना था।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने श्रीनगर की विश्वप्रसिद्ध डल झील, मनमोहक निशात बाग एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण चश्मे शाही का अवलोकन किया।

इसके साथ ही लाल चौक के स्थानीय बाजारों में खरीदारी करते हुए विद्यार्थियों ने कश्मीरी हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुओं, स्थानीय खान-पान एवं जनजीवन को नजदीक से समझा।

यात्रा के अगले पड़ाव में विद्यार्थियों ने सोनमर्ग एवं ऐतिहासिक जोजिला दर्रे का भ्रमण किया। बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों, दुर्गम पहाड़ी रास्तों और अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों ने विद्यार्थियों को रोमांचित कर दिया।

वहीं गुलमर्ग के विशाल हरे-भरे मैदानों एवं हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं के बीच विद्यार्थियों को कश्मीर की विशिष्ट भौगोलिक संरचना और प्राकृतिक संपदा को अनुभव करने का अवसर मिला।

पहलगाम प्रवास के दौरान विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध बेताब वैली, चंदनवाड़ी तथा मनमोहक सेब के बगीचों का भ्रमण किया। लिद्दर नदी के कलकल प्रवाह, सुरम्य घाटियों और देवदार के घने जंगलों ने सभी का मन मोह लिया।

सेब के बगीचों में विद्यार्थियों ने कश्मीर की प्रसिद्ध सेब की खेती, बागवानी तथा स्थानीय कृषि गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

इस यात्रा ने उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, भौगोलिक विविधताओं की समझ तथा विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करने का अवसर प्रदान किया।

साथ ही सामूहिक सहभागिता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता, आपसी सहयोग एवं नेतृत्व क्षमता जैसे जीवनोपयोगी गुणों को भी सुदृढ़ किया।

इस प्रकार कश्मीर की मनमोहक वादियों में संपन्न यह शैक्षणिक यात्रा विद्यार्थियों के लिए केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, प्रकृति से जुड़ाव और जीवनभर संजोकर रखने वाली मधुर स्मृतियों का एक अनूठा अध्याय बन गई।

सभी विद्यार्थी, शिक्षक एवं सहयोगी कर्मचारी सुरक्षित एवं हर्षोल्लास के साथ उदयपुर लौटे।