जैसलमेर । कृषि विज्ञान केंद्र, जैसलमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दीपक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में दिनांक 07.10.2026 को झाबरा गाँव में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (दलहन) के अंतर्गत मूँग की उन्नत किस्म एम. एच. 1142 पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. चतुर्वेदी ने किसानों को मूँग की उन्नत किस्म एम.एच 1142 की विशेषताओं के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि यह किस्म जल्दी परिपक्वता वाली (65-70 दिन), पीला मोजैक वायरस एवं पाउडर मिल्ड्यू रोगों के विरुद्ध रोग प्रतिरोधकता एवं उच्च उपज देने वाली जोकि शुष्क जलवायु क्षेत्रों के लिए अनुकूल है।
इसकी औसत उपज 12-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ बबलू शर्मा ने किसानों को फसल प्रणाली में दलहन फसलो की महत्ता के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि दलहन फसलो जैसे मूंग, मोठ, चना आदि को फसल प्रणाली में अपन्नाने से खेत की मृदा की उर्वरा शक्ति के साथ साथ स्वास्थ में भी सुधार होता हैं।
दलहन फसलो की जड़ो में राइजोबियम नामक जीवाणु होता है जो वातावारण में उपलब्ध नाइट्रोजन का मृदा में स्थिरीकरण कर पौधों को उपलब्ध करने में मदद करता हैं जिसे अगली फसल में बढ़वार एवं पैदावार में बढ़ोतरी होती है।
इस कार्यक्रम में कृषि विभाग, जैसलमेर के सहायक कृषि अधिकारी महेश ने किसानो को विभाग की योजनाओं के बारे में बताया।
कार्यकम में कृषि विभाग, जैसलमेर के कृषि पर्यवेक्षकों ने भी चर्चा कि फील्ड निरीक्षण के दौरान किसानों ने मूँग की उन्नत किस्म एम. एच. 1142 में फसल की बढ़वार एवं फली भराव क्षमता की प्रशंसा की किसानो द्वारा आने वाले सर्दी के मौसम में उगने वाली चने, सरसों एंव जीरे के बारे में उचित वैज्ञानिक सलाह की आवश्यकता बताई जिसके लिए केंद्र के वरिष्ट वैज्ञानिक डॉ.दीपक चतुर्वेदी ने किसानों को उन्नत किस्म, पोषक तत्व एवं सिंचाई प्रबंधन, मल्चिंग तथा जैव उर्वरकों आदि पर प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि मूँग की उन्नत किस्म एम. एच. 1142 ने अन्य स्थानीय किस्मों की तुलना में पादप वनस्पतिक विकास और उत्पादकता बेहतर बताई और आगामी वर्ष के खरीफ सीजन में वृहत स्तर पर लगाने की इच्छा व्यक्त की।
