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Udaipur News

कॉलेज परिसर में चल रहे ABC कार्यक्रम पर गंभीर सवाल, श्वानों को सुरक्षित उनके क्षेत्र में छोड़ने की मांग

मुख्य बिंदु
  • वल्लभनगर क्षेत्र के एक कॉलेज परिसर में संचालित किए जा रहे कथित ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम को लेकर पशु कल्याण कार्यकर्ता *डॉ.
  • माला मट्ठा* ने गंभीर आपत्ति जताई है।
  • उन्होंने राज्य पशु कल्याण बोर्ड एवं संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
  • माला मट्ठा का कहना है कि ABC कार्यक्रम केवल ऐसे केंद्रों पर संचालित किए जा सकते हैं जहां मानकों के अनुरूप पशु चिकित्सालय, ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी वार्ड, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।
  • किसी कॉलेज परिसर को ABC केंद्र के रूप में उपयोग करना नियमों और पशु कल्याण मानकों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
  • उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि वल्लभनगर में अभी तक विधिवत *Animal Birth Control Committee* का गठन नहीं किया गया है, जबकि ABC कार्यक्रम के संचालन एवं निगरानी के लिए समिति का गठन आवश्यक है।
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कॉलेज परिसर में चल रहे ABC कार्यक्रम पर गंभीर सवाल, श्वानों को सुरक्षित उनके क्षेत्र में छोड़ने की मांग

उदयपुर। वल्लभनगर क्षेत्र के एक कॉलेज परिसर में संचालित किए जा रहे कथित ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम को लेकर पशु कल्याण कार्यकर्ता *डॉ. माला मट्ठा* ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्य पशु कल्याण बोर्ड एवं संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

डॉ. माला मट्ठा का कहना है कि ABC कार्यक्रम केवल ऐसे केंद्रों पर संचालित किए जा सकते हैं जहां मानकों के अनुरूप पशु चिकित्सालय, ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी वार्ड, पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। किसी कॉलेज परिसर को ABC केंद्र के रूप में उपयोग करना नियमों और पशु कल्याण मानकों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि वल्लभनगर में अभी तक विधिवत *Animal Birth Control Committee* का गठन नहीं किया गया है, जबकि ABC कार्यक्रम के संचालन एवं निगरानी के लिए समिति का गठन आवश्यक है। ऐसे में कार्यक्रम की वैधता और प्रक्रियाओं पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।

शिकायत में मांग की गई है कि वर्तमान में कॉलेज परिसर में रखे गए सभी श्वानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा यदि वहां आवश्यक चिकित्सा एवं देखभाल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो उन्हें नियमानुसार सुरक्षित रूप से उनके मूल क्षेत्र (Original Territory) में छोड़ा जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि Animal Birth Control Rules, 2023 का पूर्ण पालन हो रहा है या नहीं।

पशु कल्याण कार्यकर्ताओं का कहना है कि श्वानों की नसबंदी का उद्देश्य पशु कल्याण है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य एवं जीवन के लिए भी खतरा बन सकती है।