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Udaipur News

खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन

मुख्य बिंदु
  • कृषि विभाग, आत्मा, चित्तौड़गढ़ द्वारा खेत बचाओ अभियान के तहत खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन कल गुरुवार को बड़ीसादड़ी में किया गया।
  • किसान गोष्ठी कार्यक्रम में बड़ीसादड़ी के आस पास के ग्राम पंचायत के 100 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया।
  • कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ.
  • रतन लाल सोलंकी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि किसानो को मिटटी के स्वास्थ्य और घटती उर्वरता पर चिंता जताते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने पर जोर दिया।
  • रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कठिनाई और उनके मूल्यों में वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान शुरू किया।
  • रासायनिक उवर्रकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग केवल खेती की लागत ही नहीं बढ़ाता, बल्कि खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी कम करता है।
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खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन

उदयपुर। कृषि विभाग, आत्मा, चित्तौड़गढ़ द्वारा खेत बचाओ अभियान के तहत खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन कल गुरुवार को बड़ीसादड़ी में किया गया।

किसान गोष्ठी कार्यक्रम में बड़ीसादड़ी के आस पास के ग्राम पंचायत के 100 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. रतन लाल सोलंकी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि किसानो को मिटटी के स्वास्थ्य और घटती उर्वरता पर चिंता जताते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने पर जोर दिया।

रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कठिनाई और उनके मूल्यों में वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने खेत बचाओ अभियान शुरू किया। रासायनिक उवर्रकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग केवल खेती की लागत ही नहीं बढ़ाता, बल्कि खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी कम करता है।

इसके अतिरिक्त भूजल भी दूषित होता है। उर्वरकों का अंसतु‌लित उपयोग खेती के सामने गंभीर चुनौती बन रहा है।

उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अंततः उनके लिए घाटे का सौदा ही सिद्ध होता है, क्योंकि प्रारंभ में तो फसल अच्छी होती है, लेकिन समय के साथ खेतों की मिट्टी दूषित हो जाने के कारण उपज प्रभावित होती है।

डॉ. हरीश कुमार टॉक, उप परियोजना निदेशक, आत्मा चित्तौड़गढ़ ने किसानों को अपने खेत की मिटटी जांच करवारकर (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) मिटटी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग अपनाने और फसल की आवश्यकता के अनुसार संतु‌लित पोषक तत्व प्रबंधन के आधार पर फसलो में संतुलित खाद प्रयोग करने की सलाह दी, किसानो को जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट का अधिक उपयोग करने एवं प्राकृतिक खेती को भी अपनाने का किसानो से आव्हान किया, राम चंद्र डांगी सहायक कृषि अधिकारी बड़ीसादड़ी ने फसल चक्र अपनाने और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई, जिससे मिटटी की गुणवत्ता बनी रहे।

प्रगतिशील कृषक व कृषि पर्यवेक्षक डॉ राजू बिनके पशुपालन विभाग ,रामेश्वर लाल प्रजापत, तथा कृषि पर्यवेक्षक ईश्वर लाल रावत, अशोक सिंह मीणा, कलावती धाकड़, गायत्री खटीक, रोशनी समरिया, राहुल सामरिया, महिपाल जाट, बसंती लाल धाकड़, हरिराम मीणा, विकास प्रजापत, चंदा धाकड़, कन्हैयालाल धाकड़, पुष्पेंद्र गुर्जर आदि कृषि पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।