महाकाव्य महाभारत: रचना-परंपरा, दर्शन एवं समकालीन प्रासंगिकता
महाभारत भारतीय साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक स्मृति की अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल कौरवों और पांडवों के युद्ध का आख्यान नहीं, बल्कि धर्म, सत्ता, न्याय,…
“महाकाव्य” के परिणाम
महाभारत भारतीय साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक स्मृति की अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल कौरवों और पांडवों के युद्ध का आख्यान नहीं, बल्कि धर्म, सत्ता, न्याय,…
जब गलत को सही मान लिया जाएअधर्म केवल पूजा-पाठ से विमुख होना या धार्मिक परंपराओं का पालन न करना नहीं है। अधर्म वह मानसिकता है, जिसमें मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए…
*-वासुदेव देवनानी-*विजयादशमी आते ही देश के कोने-कोने में रावण के विशाल पुतले अग्नि को समर्पित कर दिए जाते हैं। आकाश आतिशबाजी से जगमगा उठता है, दिशाएँ जय श्रीरा…
मनुष्य ने जब से अपने अस्तित्व को समझने का प्रयास किया है, तब से उसने अपने अतीत के बारे में अनेक कथाएँ गढ़ी हैं। देवताओं, दानवों, यक्षों, गंधर्वों और नागों की क…
कोटा। साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही को चुरु की संस्था हिंदी साहित्य संसद्, द्वारा साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का ' जनकवि प्रदी…