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माता, पिताओं व विद्वान आचार्यों की सेवा सुश्रुषा करना तथा उन्हें सन्तुष्ट रखना सच्ची मूर्ति पूजा हैः आचार्य शैलेश मुनि सत्यार्थी

आर्यसमाज लक्ष्मण चौक, देहरादून का 60वां दो दिवसीय वार्षिकोत्सव आज दिनांक 3 -10-2026 को सोल्लास आरम्भ हुआ। आज प्रातः 8.00 बजे से तीन बड़ी यज्ञ वेदियों में यज्ञ क…

03 Oct 2026, 16:39

हमें दैनिक अग्निहोत्र-यज्ञ करके अपने घर की वायु को सुगन्धित व रोगरहित करना चाहिये

वैदिक धर्म एवं संस्कृति में यज्ञ का प्रमुख स्थान है। यज्ञ किसी भी पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करने को कहा जाता है। मनुष्य जो शुभ कर्म करता है वह सब भी यज्ञीय कार्य …

16 Sep 2026, 18:25

मैं’ से ‘हम’ की यात्रा ही भारत के चिंतन का मूल भाव: हनुमान सिंह राठौड़

उदयपुर। पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर संयुक्त तत्वावधान में हस्तीमल व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘हम भ…

13 Sep 2026, 17:42

भारत को विश्व गुरु बनाना है तो संस्कृत को जन जन की भाषा बनाना होगाः ब्रह्मचारी कल्याण स्वरूप जी महाराज

श्रीगंगानगर। ब्रह्मचारी कल्याण स्वरूप जी महाराज ने कहा है कि जब तक संस्कृत भाषा जन-जन की भाषा नहीं बनेगी तब तक भारत विश्व गुरु नहीं बन पाएगा। देवभाषा संस्कृत ह…

31 Aug 2026, 18:38

खरतरगच्छ दिवस पर पूर्वाचार्यों के त्याग-तप को किया नमन

उदयपुर। दादावाड़ी में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के दौरान साध्वी डॉ. विद्युत प्रभा श्रीजी ने खरतरगच्छ दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा क…

18 Aug 2026, 16:34

ईश्वर अनादि काल से हमारा रक्षक, पालक व सुहृद मित्र है

मनुष्य प्रायः अपने माता, पिता, आचार्यों तथा सगे सम्बन्धियों को ही अपना मानते हैं। ईश्वर के विषय में मनुष्यों के भिन्न-भिन्न विचार होते हैं। अधिकांश को ईश्वर के…

07 Aug 2026, 18:31
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