मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
Paras Health News

केंद्रीय बजट 2026 से मरीजों को राहत, बड़े शहरों से बाहर भी उन्नत इलाज की पहुँच बढ़ेगी

- डॉ. धर्मिंदर नागर को-चेयर, FICCI हेल्थ एंड सर्विसेज़ एवं एमडी, पारस हेल्थ

मुख्य बिंदु
  • केंद्रीय बजट ऐसे समय में मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जब इलाज का खर्च बढ़ रहा है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ आम होती जा रही हैं।
  • खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहाँ विशेषज्ञ इलाज की सुविधाएँ अब भी सीमित हैं, यह बजट भरोसा देता है।
  • बायोफार्मा सेक्टर को मज़बूत करने पर दिया गया ज़ोर बहुत अहम है, क्योंकि कैंसर, डायबिटीज़ और ऑटोइम्यून बीमारियों में लंबे समय तक और उन्नत इलाज की ज़रूरत होती है।
  • देश में ही बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलने से ये दवाएँ ज़्यादा आसानी से उपलब्ध होंगी और सस्ती भी होंगी, जिससे मरीजों को अपने घर के पास बेहतर इलाज मिल सकेगा।
  • इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, बजट में 17 जीवनरक्षक दवाओं—जिसमें कई अहम कैंसर की दवाएँ भी शामिल हैं—पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है।
  • साथ ही, सात दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं, मेडिसिन्स और विशेष खाद्य पदार्थों को व्यक्तिगत आयात में छूट दी गई है।
WAf𝕏TGin✉🖨

Udaipur . केंद्रीय बजट ऐसे समय में मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जब इलाज का खर्च बढ़ रहा है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ आम होती जा रही हैं।

खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहाँ विशेषज्ञ इलाज की सुविधाएँ अब भी सीमित हैं, यह बजट भरोसा देता है।

बायोफार्मा सेक्टर को मज़बूत करने पर दिया गया ज़ोर बहुत अहम है, क्योंकि कैंसर, डायबिटीज़ और ऑटोइम्यून बीमारियों में लंबे समय तक और उन्नत इलाज की ज़रूरत होती है।

देश में ही बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलने से ये दवाएँ ज़्यादा आसानी से उपलब्ध होंगी और सस्ती भी होंगी, जिससे मरीजों को अपने घर के पास बेहतर इलाज मिल सकेगा।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, बजट में 17 जीवनरक्षक दवाओं—जिसमें कई अहम कैंसर की दवाएँ भी शामिल हैं—पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है।

साथ ही, सात दुर्लभ बीमारियों के लिए दवाओं, मेडिसिन्स और विशेष खाद्य पदार्थों को व्यक्तिगत आयात में छूट दी गई है।

इससे गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी, खासकर छोटे शहरों में, जहाँ इलाज के लिए यात्रा और अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं।

इलाज सस्ता होने से मरीज बिना रुकावट और गुणवत्ता से समझौता किए बिना अपना इलाज जारी रख सकेंगे। इसके साथ-साथ, आने वाले वर्षों में एलाइड हेल्थ वर्कफोर्स बढ़ाने की योजना अस्पतालों को बेहतर और पूरी देखभाल देने में मदद करेगी।

जांच, क्रिटिकल केयर और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित स्टाफ की बेहतर उपलब्धता से इलाज की गुणवत्ता बनी रहेगी और मरीजों के नतीजे बेहतर होंगे।

निजी क्षेत्र की भागीदारी से क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज़्म हब विकसित करने का प्रस्ताव भी एक दूरदर्शी कदम है। इससे बड़े शहरों के बाहर भी अच्छी और किफायती इलाज सुविधाएँ विकसित होंगी, जिससे देश और विदेश—दोनों के मरीजों को फायदा मिलेगा।

कुल मिलाकर, ये सभी कदम मिलकर भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को ज़्यादा सुलभ, किफायती और मरीजों की ज़रूरतों के अनुसार बनाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम हैं, खासकर कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए।