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Paras Health News

पारस हेल्थ उदयपुर में कैंसर से प्रभावित जबड़े की सफल सर्जरी

कॉम्प्लेक्स माइक्रोसर्जिकल फिबुला फ्री फ्लैप सर्जरी चेहरे की बनावट और मुंह के कामकाज को बेहतर बनाती है। साथ ही इससे स्थायी दांत लगाने के लिए मजबूत बेस तैयार होता है।

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पारस हेल्थ उदयपुर में कैंसर से प्रभावित जबड़े की सफल सर्जरी

कॉम्प्लेक्स माइक्रोसर्जिकल फिबुला फ्री फ्लैप सर्जरी चेहरे की बनावट और मुंह के कामकाज को बेहतर बनाती है। साथ ही इससे स्थायी दांत लगाने के लिए मजबूत बेस तैयार होता है।

18 अगस्त 2026, उदयपुर: पारस हेल्थ उदयपुर ने एक मरीज़ पर जबड़े की जटिल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की। मरीज़ में पहले ओरल कैंसर की बड़ी सर्जरी हुई थी।

डॉक्टरों ने जबड़े के गायब हिस्से को फिर से बनाने के लिए मरीज़ की ख़ुद की फिबुला हड्डी के एक हिस्से के साथ-साथ त्वचा और ब्लड वेसल का इस्तेमाल किया।

सर्जरी से मरीज़ के चेहरे और मुंह के काम करने के तरीके को ठीक करने में मदद मिली और भविष्य में दांतों के इलाज के लिए एक मज़बूत बेस तैयार हुआ।

यह जटिल रिकंस्ट्रक्शन पारस हेल्थ उदयपुर के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुमित सिंघल ने माइक्रोवैस्कुलर फ्री फिबुला फ्लैप तकनीक का उपयोग करके किया। मरीज़ की पहले ओरल कैंसर सर्जरी हुई थी। इस सर्जरी में गाल और जबड़े की हड्डी का एक बड़ा हिस्सा, साथ ही दांत और आस-पास के टिशू निकालने पड़े थे। इससे मरीज़ के चेहरे और जबड़े में एक बड़ा डिफेक्ट रह गया था।

पारस हेल्थ उदयपुर में सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने मरीज़ के पैर से फिबुला हड्डी का एक छोटा सा हिस्सा लिया, साथ ही ज़रूरी त्वचा और ब्लड वेसल भी लिए। फिर हड्डी को जबड़े के गायब हिस्से को फिर से बनाने के लिए आकार दिया गया और प्लेट और स्क्रू का इस्तेमाल करके उसे अपनी जगह पर फिक्स किया गया।

सर्जरी का सबसे मुश्किल हिस्सा ट्रांसप्लांट किए गए टिशू में ख़ून के बहाव (ब्लड फ्लो) को ठीक करना था। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट किए गए टिशू की ब्लड वेसल को गर्दन की ब्लड वेसल से एक हाई-पावर माइक्रोस्कोप और बहुत बारीक टांकों का इस्तेमाल करके जोड़ा।

ये टांके इंसान के बाल की मोटाई के लगभग एक-तिहाई थे। इससे फिर से बने जबड़े में ख़ून की सप्लाई बहाल करने में मदद मिली।

ठीक होने के बाद मरीज़ में फिर आगे दांतों की पुनर्स्थापना हुई। फिर से बने जबड़े में परमानेंट आर्टिफिशियल दांत लगाए गए, जिससे दांतों का अलाइनमेंट और मुंह का पूरा काम सही हुआ।

पारस हेल्थ उदयपुर के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ सुमित सिंघल ने कहा, “ओरल कैंसर के बाद रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सिर्फ़ शारीरिक कमी को ठीक करना ही नहीं होता है बल्कि यह मरीज़ को अंगों के ज़रूरी काम और आत्मविश्वास वापस पाने में मदद करने में भी मददगार होता है।

जब जबड़े और आस-पास के टिशू का एक बड़ा हिस्सा हटा दिया जाता है, तो रिकंस्ट्रक्शन बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि हमें हड्डी, सॉफ्ट टिशू और ब्लड सप्लाई को एक साथ ठीक करना होता है।

एक फिबुला फ्री फ्लैप हमें मरीज़ की अपनी हड्डी और टिशू का इस्तेमाल करके गायब जबड़े को फिर से बनाने और आगे के डेंटल रिहैबिलिटेशन के लिए एक मज़बूत बेस देने में मदद करता है।

हमारा उद्देश्य मरीज़ों को ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ खाने, बोलने और सोशलाइज़ करने में मदद करना है। माइक्रोसर्जिकल रिकंस्ट्रक्शन के लिए बहुत ध्यान से योजना बनाने, खास एक्सपर्टीज़ और ऑपरेशन के बाद चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग की ज़रूरत होती है।

पारस हेल्थ उदयपुर में मौजूद एडवांस्ड माइक्रोसर्जिकल सुविधाओं के साथ हम राजस्थान, मध्य प्रदेश और आस-पास के क्षेत्रों के मरीज़ों के लिए उनके घर के नज़दीक जटिल रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रिया की सुविधा दे पाते हैं।”

पारस हेल्थ उदयपुर के फैसिलिटी डॉयरेक्टर अनुभव सुखवानी ने बताया, “जटिल जबड़े के (जॉ) रिकंस्ट्रक्शन के लिए विशेष सर्जिकल एक्सपर्टीज़,एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और कोऑर्डिनेटेड मल्टीडिसिप्लिनरी देखभाल की ज़रूरत होती है।

पारस हेल्थ उदयपुर में हम जटिल प्रक्रिया में अपनी क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए समर्पित हैं ताकि राजस्थान और आस-पास के क्षेत्रों के मरीज़ों को घर के पास एडवांस्ड इलाज़ मिल सके।

यह सफल रिकंस्ट्रक्शन दिखाता है कि हम न सिर्फ़ कैंसर इलाज़ में बल्कि अंगों के कामकाज, अंगों की बनावट और जीवन की गुणवत्ता को ठीक करने के सफ़र में भी मरीज़ों को मदद करने पर विशेष ध्यान देते हैं।”

जिन मरीज़ों की ओरल कैंसर की बड़ी सर्जरी होती है, उनके लिए जबड़े, गाल और दांत के कुछ हिस्से निकल जाने से चबाना, निगलना और बोलना मुश्किल हो सकता है।

इससे चेहरे की बनावट भी बदल सकती है। फ्री फिबुला फ्लैप सर्जरी जैसी एडवांस्ड।

रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रिया से जबड़े के गायब हिस्सों को फिर से बनाया जा सकता है और चेहरे की रूपरेखा ठीक की जा सकती हैंl। इससे दांतों को लगाने के लिए मजबूत बेस भी तैयार हो जाता है।

इस कारण मरीज़ों को कैंसर इलाज़ के बाद अपने मुंह के काम करने के तरीके और ज़िंदगी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

भारत में ओरल कैंसर एक बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। यह प्रमुख रूप से तंबाकू और स्मोकलेस तंबाकू का ज्यादा सेवन करने से होता है।

कैंसर का जल्दी पता चलने और समय पर इलाज से कई मामलों में बड़ी सर्जरी की ज़रूरत कम हो सकती है।

जब जबड़े और आस-पास के टिशू के बड़े हिस्से को हटाने की ज़रूरत होती है, तो एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से सामान्य कामकाज और चेहरे का लुक वापस लाने में मदद मिल सकती है।

पारस हेल्थ उदयपुर राजस्थान, मध्य प्रदेश और आस-पास के क्षेत्रों के मरीज़ों को एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव इलाज़ देने के लिए समर्पित है।

हॉस्पिटल का उद्देश्य घर के पास जटिल इलाज़ (कॉम्प्लेक्स ट्रीटमेंट) प्रदान करना और मरीज़ों को न केवल कैंसर इलाज़ के दौरान बल्कि उनकी रिकवरी में भी मदद करना है, ताकि उन्हें अंगों के कामकाज, बनावट और जीवन की गुणवत्ता वापस पाने में मदद मिल सके।