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Paras Health News

पारस हेल्थ उदयपुर के डॉ. अजीत सिंह ने राष्ट्रीय सम्मेलन में स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी की चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों पर रखे विचार

उदयपुर: उदयपुर के पारस हेल्थ में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अजीत सिंह ने न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी के तहत 30 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक जयपुर में आयोजित नेशनल न्यूरोसर्जरी कॉन्फ्रेंस न्यूरोन्यूएंसेस में कॉम्प्

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पारस हेल्थ उदयपुर के डॉ. अजीत सिंह ने राष्ट्रीय सम्मेलन में स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी की चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों पर रखे विचार
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उदयपुर: उदयपुर के पारस हेल्थ में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अजीत सिंह ने न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी के तहत 30 अक्टूबर से 1 नवंबर, 2026 तक जयपुर में आयोजित नेशनल न्यूरोसर्जरी कॉन्फ्रेंस न्यूरोन्यूएंसेस में कॉम्प्लेक्स स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी पर एक स्पेशल लेक्चर दिया।

वे देश भर के उन चुने हुए और अनुभवी न्यूरोसर्जन में से थे जिन्हें एडवांस्ड न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया में अपनी विशेषज्ञता साझा करने के लिए फैकल्टी मेंबर के तौर पर बुलाया गया था।

डॉ. सिंह का लेक्चर स्पाइनल कॉर्ड के अंदर मौजूद ट्यूमर को हटाने की एडवांस्ड सर्जिकल तकनीक, इन प्रक्रिया के दौरान आने वाली तकनीकी चुनौतियों और मरीज़ों के न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को बचाने के तरीकों पर फोकस था।

उन्होंने आस-पास के नर्व पाथवे को नुकसान पहुंचाए बिना ट्यूमर तक पहुंचने और उसे हटाने में आने वाली मुश्किलों, सर्जरी के दौरान न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं के खतरे और ट्यूमर को असरदार तरीके से हटाने के साथ-साथ इन खतरों को कम करने के लिए सटीक सर्जिकल तकनीक के महत्व पर चर्चा की।

स्पाइनल इंट्रामेडुलरी ट्यूमर की सर्जरी काफी जटिल होती है, क्योंकि ये ट्यूमर स्पाइनल कॉर्ड के अंदर विकसित होते हैं। इसी हिस्से में मौजूद नर्व पाथवे शरीर की गतिविधियों और संवेदनाओं को नियंत्रित करते हैं।

इन संरचनाओं को थोड़ा सा भी नुकसान होने पर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं, जिसकी वजह से हमेशा के लिए विकलांगता या पैरालिसिस हो सकता है।

इसलिए ट्यूमर हटाते समय सर्जनों को खतरे को कम करने में मदद करने के लिए माइक्रोसर्जिकल तकनीक, इंट्राऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग और सावधानी से प्रीऑपरेटिव प्लानिंग करना ज़रूरी होता है।

इन प्रक्रियाओं की जटिलताओं के बारे में बताते हुए डॉ अजीत सिंह ने कहा, “स्पाइनल कॉर्ड में मौजूद ट्यूमर की सर्जरी के दौरान ट्यूमर को हटाने के साथ-साथ शरीर के उन न्यूरोलॉजिकल फंक्शन को सुरक्षित रखना भी बेहद ज़रूरी होता है, जो मरीज की रोज़मर्रा की गतिविधियों, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चुनौती सिर्फ़ ट्यूमर तक पहुँचकर उसे निकालना नहीं है, बल्कि उसके आस-पास के नाज़ुक न्यूरल पाथवे को बचाते हुए सर्जरी को सफ़ल बनाना है।

इसके लिए बहुत ध्यान से प्लानिंग, सटीक माइक्रोसर्जिकल तकनीक और सर्जरी के दौरान न्यूरोलॉजिकल फंक्शन का लगातार निगरानी ज़रूरी होता है।

इन अनुभवों को साथी न्यूरोसर्जन के साथ शेयर करना ज़रूरी है क्योंकि इस फील्ड में तरक्की मेडिकल कम्युनिटी की मिली-जुली सीख पर निर्भर करती है।”

इस स्पेशलाइज्ड फील्ड में डॉ. सिंह की एक्सपर्टीज़ में 17-सेंटीमीटर लंबे स्पाइनल इंट्रामेडुलरी एपेंडिमोमा को सफलतापूर्वक हटाना शामिल है। इसे इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है। यह केस उनकी न्यूरोसर्जिकल प्रैक्टिस में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह स्पाइनल कॉर्ड में होने वाले जटिल ट्यूमर को मैनेज करने में उनके अनुभव को दिखाता है।

पूरे भारत से लगभग 500 न्यूरोसर्जन ने तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। यहां न्यूरोसर्जरी में हुई तरक्की पर चर्चा करने, मुश्किल सर्जिकल प्रोसीजर से जुड़े अनुभव शेयर करने और जाने-माने स्पेशलिस्ट से सीखने का एक प्लेटफॉर्म मिला।

फैकल्टी मेंबर के रूप में डॉ. सिंह की भागीदारी नेशनल एकेडमिक चर्चाओं में उदयपुर की न्यूरोसर्जिकल विशेषज्ञता के योगदान और भारत में विशेष सर्जिकल उपचार के क्षेत्र में हो रही लगातार प्रगति को दर्शाती है।