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पीआईएमएस में बीएमवी तकनीक से दिल की  बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे को मिला नया जीवन

मुख्य बिंदु
  • पेसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, (पीआईएमएस ) उमरड़ा के कार्डियोलॉजी विभाग ने बीएमवी तकनीक से दिल की बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे का सफल उपचार कर एक बड़ी सफलता दर्ज की है।
  • पीआईएमएस के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने बताया कि बच्चे का उपचार भामाशाह योजना के तहत निशुल्क किया गया।
  • पीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.
  • महेश जैन ने बताया कि दिल की बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे के सिकुड़े माइट्रल वाल्व का उपचार अत्याधुनिक बैलून माइट्रल वाल्वो-टॉमी (बीएमवी) तकनीक से सफलतापूर्वक किया गया ।
  • जैन ने बताया कि बच्चे की विस्तृत जांच की गई तो पता चला कि उसे रुमेटिक हार्ट डिजीज है और उनका माइट्रल वाल्व अत्यधिक सिकुड़ा हुआ है।
  • ऐसे मामलों में परंपरागत रूप से दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, लेकिन डॉ.
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पीआईएमएस में बीएमवी तकनीक से दिल की  बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे को मिला नया जीवन

उदयपुर। पेसिफिक इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, (पीआईएमएस ) उमरड़ा के कार्डियोलॉजी विभाग ने बीएमवी तकनीक से दिल की बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे का सफल उपचार कर एक बड़ी सफलता दर्ज की है। पीआईएमएस के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने बताया कि बच्चे का उपचार भामाशाह योजना के तहत निशुल्क किया गया।

पीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेश जैन ने बताया कि दिल की बीमारी से पीड़ित 14 साल के बच्चे के सिकुड़े माइट्रल वाल्व का उपचार अत्याधुनिक बैलून माइट्रल वाल्वो-टॉमी (बीएमवी) तकनीक से सफलतापूर्वक किया गया ।

डॉ. जैन ने बताया कि बच्चे की विस्तृत जांच की गई तो पता चला कि उसे रुमेटिक हार्ट डिजीज है और उनका माइट्रल वाल्व अत्यधिक सिकुड़ा हुआ है।

ऐसे मामलों में परंपरागत रूप से दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है, लेकिन डॉ. जैन ने जोखिम और जटिलताओं को देखते हुए बीएमवी तकनीक को अपनाया। यह प्रक्रिया कम इनवेसिव है, जिससे मरीज को शीघ्र आराम मिलता है और अस्पताल में रुकने की अवधि भी कम हो जाती है।

सर्जरी और बाकी प्रक्रिया कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश जैन और उनकी टीम ने की। इसमें कॉर्डिक एनेथेस्टिक डॉ. विपिन सिसोदिया, सीटीवीएस सर्जन डॉ. विवेक रावत ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्या है बीएमवी तकनीक? डॉ. जैन ने बताया कि बैलून माइट्रल वाल्वो-टॉमी (BMV) एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें एक विशेष बैलून कैथेटर के माध्यम से सिकुड़े हुए माइट्रल वाल्व को धीरे-धीरे फैलाया जाता है ताकि रक्त प्रवाह सामान्य हो सके।

यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयुक्त होती है, जिनमें रुमेटिक हार्ट डिजीज के कारण वाल्व में रुकावट आ जाती है। इसमें ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में कम जोखिम, शीघ्र रिकवरी होने की संभावना है।

डॉ. जैन ने बताया कि बीएमवी तकनीक आने वाले समय में दिल की बीमारी से जूझ रहे अनेक मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है, खासकर जब मरीज ओपन हार्ट सर्जरी से बचना चाहते हैं या नहीं करवा सकते।