मुख्य सामग्री पर जाएँ
रविवार, 20 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Pacific Umarada

पीआईएमएस में जटिल ब्रोंकोस्कोपी से 23 वर्षीय युवती का सिकुड़ा फेफड़ा हुआ पुनः सक्रिय

उदयपुर। पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस), उमरड़ा के श्वसन रोग विभाग में पाली, राजस्थान से रेफर होकर आई 23 वर्षीय युवती को

WAf𝕏TGin🖨
पीआईएमएस में जटिल ब्रोंकोस्कोपी से 23 वर्षीय युवती का सिकुड़ा फेफड़ा हुआ पुनः सक्रिय

उदयपुर। पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस), उमरड़ा के श्वसन रोग विभाग में पाली, राजस्थान से रेफर होकर आई 23 वर्षीय युवती को सांस लेने में तकलीफ, बाईं ओर सीने में दर्द, बलगम के साथ खांसी, बुखार, सामान्य कमजोरी, वजन में कमी तथा भूख न लगने की शिकायत के साथ भर्ती किया गया।

प्रारंभिक जांच में किए गए चेस्ट एक्स-रे एवं एचआरसीटी चेस्ट में मरीज के बाएं फेफड़े के पूर्ण रूप से सिकुड़ जाने का पता चला।

इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने तत्काल ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया।ब्रोंकोस्कोपी के दौरान पाया गया कि मरीज का लेफ्ट मेन ब्रोंकस पूरी तरह अवरुद्ध था, जिसके कारण ब्रोंकोस्कोप को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका।

चिकित्सकों ने अवरुद्ध स्थान से ब्रोंकोएल्वियोलर लैवेज, ब्रश साइटोलॉजी एवं बायोप्सी के नमूने प्राप्त किए। इसके पश्चात एन-एसिटाइल सिस्टीन का इंस्टिलेशन किया गया, जिससे जमा हुआ म्यूकस प्लग सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया।

प्रक्रिया के बाद किए गए एक्स-रे में बायां फेफड़ा पुनः फैल गया तथा मरीज की सांस लेने में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

आगे की जांच में मरीज में एंडोब्रोंकियल ट्यूबरकुलोसिस का निदान हुआ, जिसके बाद उसका आवश्यक उपचार प्रारंभ कर दिया गया।यह जटिल उपचार डॉ. मयूर देवराज, डॉ. राजू कोट्टाकोटा, डॉ. सनिध्य टाक, डॉ. करण राज सिंघल एवं डॉ. अनिरुद्ध एरॉन के मार्गदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टरों तथा ब्रोंकोस्कोपी टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।संस्थान के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने बताया कि पीआईएमएस में आधुनिक ब्रोंकोस्कोपी सुविधाओं और अनुभवी विशेषज्ञों की उपलब्धता के कारण जटिल श्वसन रोगों का समय पर एवं सटीक निदान संभव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

समय पर जांच और उचित उपचार से गंभीर फेफड़ों की बीमारियों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।