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एमपीयूएटी के शोधार्थी अंशुल शर्मा ने मक्का उत्पादन में सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट के प्रभाव पर पीएच.डी. शोध सफलतापूर्वक पूर्ण किया

मुख्य बिंदु
  • महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय के शस्य विज्ञान विभाग के शोधार्थी अंशुल शर्मा ने वर्मीकम्पोस्ट के साथ सिलिका का मक्का (जिया मेज एल.
  • ) की वृद्धि एवं उपज पर प्रभाव विषय पर अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
  • अरविंद वर्मा, प्रमुख सलाहकार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
  • शोध का उद्देश्य मक्का फसल में सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट के समन्वित उपयोग के प्रभाव का अध्ययन करना था, जिससे फसल की वृद्धि, उपज तथा पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग की संभावनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।
  • इस शोध में प्राप्त परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट का संतुलित एवं समन्वित उपयोग मक्का की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
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एमपीयूएटी के शोधार्थी अंशुल शर्मा ने मक्का उत्पादन में सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट के प्रभाव पर पीएच.डी. शोध सफलतापूर्वक पूर्ण किया

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय के शस्य विज्ञान विभाग के शोधार्थी अंशुल शर्मा ने वर्मीकम्पोस्ट के साथ सिलिका का मक्का (जिया मेज एल.) की वृद्धि एवं उपज पर प्रभाव विषय पर अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

यह शोधकार्य डॉ. अरविंद वर्मा, प्रमुख सलाहकार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। शोध का उद्देश्य मक्का फसल में सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट के समन्वित उपयोग के प्रभाव का अध्ययन करना था, जिससे फसल की वृद्धि, उपज तथा पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग की संभावनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।

इस शोध में प्राप्त परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि सिलिका एवं वर्मीकम्पोस्ट का संतुलित एवं समन्वित उपयोग मक्का की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में प्रभावी सिद्ध हो सकता है। साथ ही, यह तकनीक मृदा स्वास्थ्य सुधारने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

उल्लेखनीय है कि इस शोधकार्य के लिए प्रधानमंत्री डॉक्टोरल रिसर्च फेलोशिप के अंतर्गत अनुसंधान सहायता प्राप्त हुई, जिसने उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंशुल शर्मा ने अपने शोध की सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, प्रमुख सलाहकार, विभाग के समस्त शिक्षकों, विश्वविद्यालय प्रशासन तथा सहयोगियों को दिया।