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पूज्य सतगुरु श्री बाबा द्वारकादास जी महाराज की 45वीं बारहमासी बरसी का आयोजन

मुख्य बिंदु
  • पूज्य सतगुरु श्री बाबा द्वारकादास जी महाराज साहिब की 45वीं वर्सी उत्सव श्रद्धा एवं प्रेमपूर्वक मनाई जा रही है।
  • संतों की वाणी और भक्ति रस से सराबोर यह तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम शक्तिनगर स्थित “संत निवास”, उदयपुर में आयोजित हो रहा है।
  • कार्यक्रम की जानकारी देते हुए वैकुण्ठ धाम के गुरुजी श्री शैलेश कुमार ब्रिजवानी ने बताया कि इस अवसर पर “सतगुरु भक्ति वह दीप है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्मा में प्रकाश भर देता है” — इस भावना के साथ तीन अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ 8 नवम्बर शनिवार सुबह 11 बजे किया गया।
  • यह आयोजन 10 नवम्बर सोमवार को भोग साहिब एवं लंगर प्रसाद के साथ पूर्ण होगा।
  • रात्रि को भक्ति भाव से ओतप्रोत कीर्तन सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें प्रसिद्ध कीर्तनकार भाई सन्नी मुलचंदानी (नवसारी वाले) सत्संग प्रेमियों को भजन-सुमिरन के रस में डुबो देंगे।
  • रात्रि कीर्तन 9 नवम्बर रात्रि 8:30 बजे से हुआ।
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पूज्य सतगुरु श्री बाबा द्वारकादास जी महाराज की 45वीं बारहमासी बरसी का आयोजन

उदयपुर। पूज्य सतगुरु श्री बाबा द्वारकादास जी महाराज साहिब की 45वीं वर्सी उत्सव श्रद्धा एवं प्रेमपूर्वक मनाई जा रही है। संतों की वाणी और भक्ति रस से सराबोर यह तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम शक्तिनगर स्थित “संत निवास”, उदयपुर में आयोजित हो रहा है।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए वैकुण्ठ धाम के गुरुजी श्री शैलेश कुमार ब्रिजवानी ने बताया कि इस अवसर पर “सतगुरु भक्ति वह दीप है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर आत्मा में प्रकाश भर देता है” — इस भावना के साथ तीन अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ 8 नवम्बर शनिवार सुबह 11 बजे किया गया। यह आयोजन 10 नवम्बर सोमवार को भोग साहिब एवं लंगर प्रसाद के साथ पूर्ण होगा।

रात्रि को भक्ति भाव से ओतप्रोत कीर्तन सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें प्रसिद्ध कीर्तनकार भाई सन्नी मुलचंदानी (नवसारी वाले) सत्संग प्रेमियों को भजन-सुमिरन के रस में डुबो देंगे। रात्रि कीर्तन 9 नवम्बर रात्रि 8:30 बजे से हुआ।

गुरुजी शैलेश संत कुमार ब्रिजवानी ने बताया कि आयोजन के दौरान प्रतिदिन आसादीवार, शब्द कीर्तन, आरती, सत्संग एवं रागमाला पाठ के माध्यम से सतगुरु की शिक्षाओं का प्रसार होगा। समापन दिवस पर आरती, अरदास एवं सामूहिक लंगर साहिब के साथ वर्सी उत्सव का पवित्र समापन किया जाएगा।

भक्ति, प्रेम और गुरु स्मरण से ओतप्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक आनंद और शांति का संदेश लेकर आया है।