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महाराणा भगवतसिंह मेवाड़ की 41वीं पुण्यतिथि  पर पूजा-अर्चना  एवं पुष्पाजंलि

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर, मेवाड़ के 75वें श्री एकलिंग दीवान महाराणा भगवतसिंह जी मेवाड़ की 41वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महासत्या स्थित उनकी छतरी पर श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर पुष्पाजंलि अर्पित की गई।
  • महाराणा भगवतसिंह मेवाड़ की पुण्यतिथि कार्तिक शुक्ल दशमी को मनाई गई, इस अवसर पर महासत्या स्थित उनकी छतरी को पुष्प-माला और आशापाल के पत्तों से सुसज्जित कर वहां प्रातः पुरोहित जी एवं करमांत्री जी के सानिध्य में विशेष पूजन कर नैवेद्य, नारियल भेंट किये गये तत्पश्चात आरती सम्पन्न हुई।
  • इस अवसर पर महासत्या जी स्थित महाराणा भूपालसिंह जी की छतरी को भी पुष्प माला और आशापाल के पत्तों से सजाया गया।
  • महासत्या की पूजा के पश्चात श्री देवराजेश्वर जी महादेव मन्दिर पर पिण्डदान व तर्पण किये गये तथा नैवेद्य आदि चढ़ा पूजा-अर्चना सम्पन्न की गई।
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महाराणा भगवतसिंह मेवाड़ की 41वीं पुण्यतिथि  पर पूजा-अर्चना  एवं पुष्पाजंलि

उदयपुर, मेवाड़ के 75वें श्री एकलिंग दीवान महाराणा भगवतसिंह जी मेवाड़ की 41वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महासत्या स्थित उनकी छतरी पर श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर पुष्पाजंलि अर्पित की गई।

महाराणा भगवतसिंह मेवाड़ की पुण्यतिथि कार्तिक शुक्ल दशमी को मनाई गई, इस अवसर पर महासत्या स्थित उनकी छतरी को पुष्प-माला और आशापाल के पत्तों से सुसज्जित कर वहां प्रातः पुरोहित जी एवं करमांत्री जी के सानिध्य में विशेष पूजन कर नैवेद्य, नारियल भेंट किये गये तत्पश्चात आरती सम्पन्न हुई।

इस अवसर पर महासत्या जी स्थित महाराणा भूपालसिंह जी की छतरी को भी पुष्प माला और आशापाल के पत्तों से सजाया गया। महासत्या की पूजा के पश्चात श्री देवराजेश्वर जी महादेव मन्दिर पर पिण्डदान व तर्पण किये गये तथा नैवेद्य आदि चढ़ा पूजा-अर्चना सम्पन्न की गई।