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Entertainment

निर्देशक राजीव सिंह दिनकर की भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति 'मेरे कृष्ण'

मुख्य बिंदु
  • भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति 'मेरे कृष्ण' में सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी शर्मा राधा एवं महामाया के रूप में, तथा अर्पित रांका दुर्योधन एवं कंस की भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
  • नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है।
  • इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा किया गया है।
  • नरेश कात्यायन हैं तथा इसका मौलिक संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है।
  • वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक के दृश्यों का समावेश इस नाटक में किया गया है।
  • 2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला 'मेरे कृष्ण' एक गहन रंगमंचीय अनुभव है, जो श्रीकृष्ण के जीवन के दिव्य, मानवीय और दार्शनिक आयामों की यात्रा कराता है।
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निर्देशक राजीव सिंह दिनकर की भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति 'मेरे कृष्ण'

भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति 'मेरे कृष्ण' में सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी शर्मा राधा एवं महामाया के रूप में, तथा अर्पित रांका दुर्योधन एवं कंस की भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है। इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा किया गया है।

नाटक के लेखक डॉ. नरेश कात्यायन हैं तथा इसका मौलिक संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है। वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक के दृश्यों का समावेश इस नाटक में किया गया है।

2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला 'मेरे कृष्ण' एक गहन रंगमंचीय अनुभव है, जो श्रीकृष्ण के जीवन के दिव्य, मानवीय और दार्शनिक आयामों की यात्रा कराता है।

यह नाटक 20 जीवंत दृश्यों में प्रकट होता है, जिनमें श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख अध्यायों को दर्शाया गया है।

शाश्वत दर्शन में निहित होते हुए भी, इसकी कथा शैली मनोरंजक, दृश्यात्मक रूप से समृद्ध और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, जिसमें नाट्यकला, संगीत, नृत्य और मल्टीमीडिया का सुंदर समन्वय है।

यह नाटक श्रीकृष्ण के जीवन के कुछ कम ज्ञात प्रसंगों और दृष्टिकोणों को भी उजागर करता है। इस नाटक के प्रत्येक दृश्य को गतिमान चित्रकला की तरह परिकल्पित किया गया है, जहाँ रंगमंच, दृश्य कला और आध्यात्मिक अन्वेषण एक-दूसरे से मिलते हैं।

इस नाटक के मंचन का मुख्य उद्देश्य यह है कि इस नाटक को देखने वाला प्रत्येक दर्शक यह प्रश्न लेकर न जाए कि 'श्रीकृष्ण कौन हैं ...?' बल्कि यह अनुभूति लेकर जाए कि 'श्रीकृष्ण मेरे भीतर सदैव हैं...।

बकौल निर्देशक राजीव सिंह दिनकर इस नाटक का स्वर शैली काव्यात्मक होने के साथ आधुनिक है, दार्शनिक होते हुए भी मनोरंजक है। इस नाटक के जरिए लोकहित में देश की जनता के बीच एक संवाद जागृत करना चाहते हैं।

पूजा के बारे में नहीं, बल्कि जागरूकता के बारे में।