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स्टार्टअप  प्रारंभ करने के लिए कमिटमेंट,  कनविक्शन और करेज जरूरी    : डॉ अनिल मेहता 

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर : युवा तकनीकी विद्यार्थी केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और तकनीकी पाठ्यक्रमों का समुचित लाभ उठाकर स्वयं का स्टार्टअप स्थापित कर सकता है एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
  • स्वरोजगार प्रारंभ करने के लिए विभिन्न सरकारी एवं अर्ध-सरकारी एजेंसियां वित्तीय सहायता, तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही हैं।
  • आवश्यकता केवल इस बात की है कि युवा वर्ग तीन सी: कमिटमेंट, कनविक्शन और करेज के साथ पहल करे और अवसरों को पहचानकर आगे बढ़े।
  • यह विचार विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ.
  • अनिल मेहता ने मंगलवार को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा प्रायोजित उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला में व्यक्त किए।
  • उन्होंने कहा कि आज का युग नवाचार और तकनीकी दक्षता का है।
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स्टार्टअप  प्रारंभ करने के लिए कमिटमेंट,  कनविक्शन और करेज जरूरी    : डॉ अनिल मेहता 

उदयपुर :   युवा तकनीकी  विद्यार्थी  केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और तकनीकी पाठ्यक्रमों का समुचित लाभ उठाकर  स्वयं का स्टार्टअप स्थापित कर सकता है एवं  रोजगार सृजन में  महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्वरोजगार प्रारंभ करने के लिए विभिन्न सरकारी एवं अर्ध-सरकारी एजेंसियां वित्तीय सहायता, तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि युवा वर्ग तीन सी:  कमिटमेंट,  कनविक्शन और करेज  के साथ पहल करे और अवसरों को पहचानकर आगे बढ़े।  

यह विचार विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने मंगलवार को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा प्रायोजित उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का युग नवाचार और तकनीकी दक्षता का है। यदि युवा सही दिशा में प्रशिक्षण प्राप्त कर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।मेहता ने कहा कि  स्किल तथा स्टार्टअप सपोर्ट के इकोसिस्टम का लाभ उठाकर  हर युवा एक सफल उद्यमी बन सकता है।


डॉ. मेहता ने बताया कि विद्या भवन का सरस्वती मेकेट्रोनिक्स सेंटर ऑटोमेशन, मेकेट्रोनिक्स तथा एडवांस प्रोडक्शन तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है। ये तकनीकें आज के औद्योगिक परिदृश्य की आधारशिला हैं और मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, स्मार्ट प्रोडक्शन तथा इंडस्ट्री 4.0 की  अवधारणाओं को सशक्त बनाती हैं। ऐसे कौशल से सुसज्जित युवा न केवल नौकरी के अवसर प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि स्वयं के उद्यम भी स्थापित कर सकते हैं।

कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर भिवाड़ी के वरिष्ठ प्रबंधक राकेश पति एवं डॉ. महेंद्र सिंह यादव ने मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न तकनीकी एवं उद्यमिता पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार नवाचार आधारित स्टार्टअप और पारंपरिक उद्योगों के आधुनिकीकरण के लिए अनेक प्रोत्साहन योजनाएं संचालित कर रही है।

विशेषज्ञों ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) तथा पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जीवन हेतु निधि योजना (SFURTI) जैसी योजनाओं की जानकारी दी। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को वित्तीय अनुदान, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और विपणन सहयोग प्रदान किया जाता है। साथ ही भिवाड़ी टेक्नोलॉजी सेंटर पर उपलब्ध अत्याधुनिक स्किल पाठ्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से बताया ।

कार्यक्रम का संचालन संस्था के आईएसटीई एवं आईएआई चैप्टर के संयोजक भुवन आमेटा, डॉ. विक्रम सिंह कुमावत, जय शर्मा तथा आभा जैन ने किया।