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विद्यापीठ के डॉ. चंद्रेश छतलानी ने बनाया नौवाँ रिकॉर्ड

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर / उदयपुर के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के प्रतिभाशाली शिक्षाविद् एवं नवाचारकर्मी डॉ.
  • चंद्रेश कुमार छतलानी ने एक बार फिर विद्यापीठ और शहर का नाम गौरवान्वित किया है।
  • प्रतिष्ठित पैरामाउंट अचीवमेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें एक वर्ष में सर्वाधिक एजुकेशनल, स्किल-बेस्ड एवं लर्निंग-ओरिएंटेड सॉफ्टवेयर निर्मित करने के लिए विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया है।
  • छतलानी द्वारा बनाए गए ये सॉफ्टवेयर विभिन्न विषयों में छात्रों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी, रोचक और तकनीक-सक्षम बनाते हैं, जो डिजिटल शिक्षा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान है।
  • इससे पूर्व भी वे श्रीलंका स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड, ट्रिब्यून इंटरनेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तथा वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड्स से सर्वाधिक शैक्षणिक प्रमाण-पत्र प्राप्त करने जैसे दुर्लभ रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं।
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विद्यापीठ के डॉ. चंद्रेश छतलानी ने बनाया नौवाँ रिकॉर्ड

उदयपुर / उदयपुर के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के प्रतिभाशाली शिक्षाविद् एवं नवाचारकर्मी डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी ने एक बार फिर विद्यापीठ और शहर का नाम गौरवान्वित किया है।

प्रतिष्ठित पैरामाउंट अचीवमेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें एक वर्ष में सर्वाधिक एजुकेशनल, स्किल-बेस्ड एवं लर्निंग-ओरिएंटेड सॉफ्टवेयर निर्मित करने के लिए विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया है।

डॉ. छतलानी द्वारा बनाए गए ये सॉफ्टवेयर विभिन्न विषयों में छात्रों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी, रोचक और तकनीक-सक्षम बनाते हैं, जो डिजिटल शिक्षा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान है।

इससे पूर्व भी वे श्रीलंका स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड, ट्रिब्यून इंटरनेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तथा वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट रिकॉर्ड्स से सर्वाधिक शैक्षणिक प्रमाण-पत्र प्राप्त करने जैसे दुर्लभ रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं।

इसके साथ ही, एक व्यक्ति द्वारा लिखी गई अधिकतम अंग्रेज़ी लघुकथाओं की पुस्तक, मूलतः अंग्रेज़ी में लिखी गई भारतीय विधा लघुकथा की प्रथम पुस्तक तथा अधिकतम शैक्षणिक गेम्स ऑनलाइन एप्लीकेशंस निर्माण जैसे विशिष्ट रिकॉर्ड भी उनके खाते में हैं, इसी वर्ष वर्ल्ड एक्सीलेंस बुक ऑफ़ रिकॉर्ड ने भी इसी रिकॉर्ड को मान्यता प्रदान की है।

अब तक 17 पुस्तकों के लेखक और 10 पुस्तकों के संपादक रह चुके डॉ. छतलानी ने इस उपलब्धि को अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित करते हुए इसे भावनात्मक श्रद्धांजलि बताया।