उदयपुर, । विश्वविद्यालयी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, तकनीकी नवाचार और परीक्षा संचालन को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजेश चंद्र कुमावत को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान बदलाव संस्थान की ओर से पैसिफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार “लोकतांत्रिक समाजों में मानवाधिकारों का वैश्विक परिदृश्य” के दौरान 20 सितंबर को प्रदान किया गया।
डॉ. कुमावत को यह सम्मान विश्वविद्यालयों में परीक्षाओं के सफल संचालन, समयबद्ध परिणाम घोषणा, उत्तर पुस्तिकाओं में व्यापक एवं समयानुकूल बदलाव, परीक्षा प्रक्रियाओं के तकनीकीकरण, प्रश्न-पत्रों के प्रारूप में सुधार, सेमेस्टर प्रणाली एवं चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) को लागू करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) के विभिन्न आयामों को विश्वविद्यालयी परीक्षा प्रणाली में प्रभावी रूप से लागू करने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
परीक्षा प्रशासन में लंबा अनुभव
वर्तमान में डॉ. कुमावत गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उदयपुर में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे साई तिरुपति विश्वविद्यालय, उदयपुर में भी परीक्षा नियंत्रक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
परीक्षा प्रशासन और सुधारों के क्षेत्र में उनके योगदान को इससे पहले भी विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2022 में उदयपुर संभाग स्तर पर गणतंत्र दिवस समारोह में जिला कलेक्टर द्वारा उन्हें बेस्ट ऑफिसर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। वहीं, विश्वविद्यालय परीक्षाओं के व्यापक संचालन, सुधार एवं विभिन्न नवाचारों के सफल क्रियान्वयन में विशिष्ट योगदान के लिए ग्लोबल स्कॉलर्स फाउंडेशन, पुणे द्वारा उन्हें बेस्ट परीक्षा नियंत्रक अवार्ड भी प्रदान किया जा चुका है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के कौशल विकास पर जोर
अपने लंबे कार्यकाल के दौरान डॉ. कुमावत ने राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अधिकारियों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के व्यावसायिक कौशल और प्रशासनिक क्षमताओं के विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया।
उन्होंने समय-समय पर कुलसचिव, सहायक एवं उपकुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त नियंत्रक तथा प्रशासनिक अधिकारियों सहित गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए अनेक वर्कशॉप, सेमिनार और परामर्श कार्यक्रम आयोजित करवाए।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान, पेशेवर दक्षता और प्रभावी परामर्श कौशल को विकसित करना रहा।
विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिषद में भी रहे सदस्य
डॉ. कुमावत की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों तथा उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए वर्ष 2023 में तत्कालीन कुलाधिपति एवं राज्यपाल द्वारा राज ऋषि भृतहरि विश्वविद्यालय, अलवर की विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिषद में दो वर्ष के लिए सदस्य नियुक्त किया गया था।
यह नियुक्ति उनके दीर्घ अनुभव और उच्च शिक्षा एवं परीक्षा प्रशासन के क्षेत्र में योगदान की मान्यता के रूप में देखी गई।
कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत समन्वय की पहल
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में डॉ. कुमावत ने लगभग दो वर्षों तक निदेशक, कॉलेज विकास परिषद का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला। इस दौरान उन्होंने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक नवाचारों को सरलता और सुगमता से लागू कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय के बीच संवाद और समन्वय को मजबूत करने के लिए समय-समय पर कॉन्फ्रेंस, परामर्श कार्यक्रम एवं अन्य अकादमिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें से कई कार्यक्रम आज भी प्रतिवर्ष आयोजित किए जा रहे हैं।
डॉ. कुमावत को मिला यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड परीक्षा सुधार, तकनीकीकरण, शैक्षणिक प्रशासन, संस्थागत विकास और मानव संसाधन क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान की महत्वपूर्ण पहचान है।
