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‘जयतु संस्कृम, जयतु भारतम’ -संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में झलका उत्साह 

-संस्कृत के प्रति बढ़ता प्रेम संस्कृति के पुनर्स्थापन का संकेत 

-संस्कृत के प्रति बढ़ता प्रेम संस्कृति के पुनर्स्थापन का संकेत

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर, संस्कृतभारती उदयपुर की ओर से मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह 2025 के तहत बुधवार को दूसरे दिन संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में बच्चों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • प्रतियोगिता के कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग में 40 समूहों में 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
  • संस्कृतभारती उदयपुर के डॉ.
  • यज्ञ आमेटा ने बताया आलोक सीनियर सेकेंडरी हिरण मगरी सेक्टर-11 में आयोजित संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में अतिथि के रूप में आलोक संस्थान के निदेशक डॉ.
  • प्रदीप कुमावत, समाजसेवी शांतिलाल वेलावत व प्राचार्य शशांक टांक का सान्निध्य मिला।
  • अतिथियों ने कहा कि संस्कृत के प्रति बढ़ता प्रेम सनातन संस्कृति के पुनर्स्थापन का संकेत है।
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‘जयतु संस्कृम, जयतु भारतम’  -संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में झलका उत्साह 

उदयपुर, संस्कृतभारती उदयपुर की ओर से मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह 2025 के तहत बुधवार को दूसरे दिन संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में बच्चों की सुमधुर प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता के कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग में 40 समूहों में 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।

संस्कृतभारती उदयपुर के डॉ. यज्ञ आमेटा ने बताया आलोक सीनियर सेकेंडरी हिरण मगरी सेक्टर-11 में आयोजित संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में अतिथि के रूप में आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत, समाजसेवी शांतिलाल वेलावत व प्राचार्य शशांक टांक का सान्निध्य मिला।

अतिथियों ने कहा कि संस्कृत के प्रति बढ़ता प्रेम सनातन संस्कृति के पुनर्स्थापन का संकेत है। बच्चों में संस्कृत के प्रति रुचि जगेगी तो वेदों के गहन अध्ययन की दिशा प्रशस्त होगी।

निर्णायक गण में धरोहर संस्थान से जगदीश थोसर एवं अंशुल जैन शामिल थे।

प्रतिभागियों ने ‘जयतु संस्कृम, जयतु भारतम’, ‘सरल भाषा संस्कृत भाषा’, ‘मृदपि च चन्दनमस्मिन् देशे ग्रामो ग्रामः सिद्धवनम’, ‘हरिमन्दिरमिदमखिलशरीरम, सुरस सुबोधा विश्व मानोज्ञा, यत्र च क्रीडायै वनराजः, धेनुर्माता परमशिवा’, ‘सर्वलोकेषु रम्यं हि भारतमस्मदीयं, मदीयम’, ‘भवतु भारतं भवतु भारतं’ आदि संस्कृत गीतों के सुमधुर गायन से सभी का मन जीत लिया।

प्रतियोगिता में अलोक हिरण मगरी से 11, आरएमवी गेलड़ा , आलोक पंचवटी व फतेहपुरा, इंडो अमेरिकन, गुरु नानक से 4, द स्कॉलर्स एरेना आर के पुरम व गारियावास, दिल्ली पब्लिक स्कूल, नीरजा मोदी स्कूल, एमपीएस, एमएमवीएम, महावीर अकादमी, मिरांडा उच्च माध्यमिक विद्यालय, आरएमडीपीएस, संस्कृत विद्यालय सवीना, आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, रायन इण्टरनेशनल स्कूल रॉकवुड्स हाई स्कूल, शिशु भारती स्कूल संत एंथॉनीज़ उच्च माध्यमिक विद्यालय, संत जोसफ मध्यमिक विद्यालय, सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल, सैन्ट्रल अकैडमी, से.3 व से.5, हैप्पी होम स्कूल, अभिनव विद्यालय आदि उपस्थित रहे।

संस्कृत भारती के नरेंद्र शर्मा, संयोजक श्रीयांश कंसारा, डॉ. रेणु पालीवाल, मीनाक्षी द्विवेदी, चैनशंकर दशोरा, कुलदीप जोशी, संजय शांडिल्य, सागर डांगा, साहिल डांगा, रेखा सिसोदिया , दुष्यंत नागदा आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।