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Barmer News

अजमल घर ने फिर लिया अवतार: बाड़मेर में ‘बाबा रामदेव अवतार धाम’ ग्राम पंचायत की ऐतिहासिक स्थापना

मुख्य बिंदु
  • राजस्थान की भक्ति भूमि बाड़मेर में शुक्रवार को इतिहास रच दिया गयाA जब लोकदेवता बाबा रामदेव पीर “बाबा रामदेव अवतार धाम” नामक नवीन ग्राम पंचायत बनी।
  • यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं] बल्कि J)k लोक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया है।
  • इस ऐतिहासिक ग्राम पंचायत की स्थापना के पीछे सूत्रधार रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा व विधायक आदुराम मेघवाल] जिनके सतत प्रयासों] जनसमर्पण और बाबा रामदेव जी के प्रति गहरी आस्था के परिणामस्वरूप यह कार्य साकार रूप ले पाया।
  • राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत इस ग्राम पंचायत में निम्नलिखित चार राजस्व गांवों को सम्मिलित किया गया है: 1.
  • बाबा रामदेव अवतार धाम 2.
  • धुंधवालों की ढाणी इस नवगठित ग्राम पंचायत को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरी खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।
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अजमल घर ने फिर लिया अवतार: बाड़मेर में ‘बाबा रामदेव अवतार धाम’ ग्राम पंचायत की ऐतिहासिक स्थापना

बाड़मेर। राजस्थान की भक्ति भूमि बाड़मेर में शुक्रवार को इतिहास रच दिया गयाA जब लोकदेवता बाबा रामदेव पीर “बाबा रामदेव अवतार धाम” नामक नवीन ग्राम पंचायत बनी।

यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं] बल्कि J)k लोक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया है।

इस ऐतिहासिक ग्राम पंचायत की स्थापना के पीछे सूत्रधार रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह खारा व विधायक आदुराम मेघवाल] जिनके सतत प्रयासों] जनसमर्पण और बाबा रामदेव जी के प्रति गहरी आस्था के परिणामस्वरूप यह कार्य साकार रूप ले पाया।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत इस ग्राम पंचायत में निम्नलिखित चार राजस्व गांवों को सम्मिलित किया गया है: 1. बाबा रामदेव अवतार धाम 2. चिबड़ा मगरा 3. ऊँचावड़ा 4. धुंधवालों की ढाणी इस नवगठित ग्राम पंचायत को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरी खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है।

लोग इसे “अजमल घर का पुनः अवतरण” मान रहे हैं] क्योंकि बाबा रामदेव जिनका जन्म ऊंडू काश्मीर (बाड़मेर) में अजमल जी के घर हुआ था] अब एक बार फिर उसी पावन धरा पर ग्राम पंचायत के रूप में अवतरित हुए हैं।

यह क्षेत्र अब न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा] बल्कि लोक संस्कृति] सामाजिक समरसता और विकास की दृष्टि से भी एक नई पहचान स्थापित करेगा।

बाबा रामदेव समाज में छुआछूत] भेदभाव और साम्प्रदायिकता के विरुद्ध खड़े हुए उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

स्वरूप सिंह खारा व विधायक आदुराम मेघवाल की इस पहल को क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है जिसने आस्था को प्रशासनिक स्वरूप प्रदान किया और लोकदेवता की विरासत को जीवित रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित किया।