उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में सोमवार को नियमित व्याख्यान में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि जीवन में मोह से मुक्ति के लिए परिवर्तन को स्वीकार करना जरूरी है।
उन्होंने भगवान आदिनाथ और भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिनाथ ने माता मरुदेवी को पीछे छोड़कर संयम पथ अपनाया और उनके जीवन में ऐसा परिवर्तन आया कि उन्हें केवल्य ज्ञान एवं निर्वाण की प्राप्ति हुई।
वहीं महावीर ने माता के प्रति संवेदनशीलता रखते हुए जीवनकाल में उन्हें नहीं छोड़ने का संकल्प लिया था। साध्वीश्री ने कहा कि सुख-दुःख जैसी भी परिस्थिति आए, उसे सहजता से आत्मसात करना चाहिए।
इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना, नमन रुचि, योगरुचि एवं तन्मय रुचि श्रीजी ने गीत प्रस्तुत किया।