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वन्यजीवों के बीच पहुंचकर खिले बच्चों के चेहरे, संरक्षण का लिया संकल्प

विश्व वन्यजीव सप्ताह के तहत नाहरगढ़ जैविक उद्यान में विमुक्ति स्कूल की छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण

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वन्यजीवों के बीच पहुंचकर खिले बच्चों के चेहरे, संरक्षण का लिया संकल्प

जयपुर। विश्व वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को नाहरगढ़ जैविक उद्यान में ग्रीन पीपल सोसायटी के जयपुर चैप्टर की ओर से वन विभाग के सहयोग से विमुक्ति स्कूल की छात्राओं के लिए विशेष शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। करीब 30 छात्राओं और दो शिक्षिकाओं श्रीमती एकता एवं भूमि ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

भ्रमण के दौरान छात्राओं को बाघ, सिंह, तेंदुआ, हिप्पोपोटामस, भालू, सियार, लकड़बग्घा, भेड़िया, जंगली कुत्ता, सांभर, चीतल, काकड़, काला हिरण और जंगली बिल्ली सहित अनेक वन्यजीवों को करीब से देखने और उनके बारे में रोचक जानकारी जानने का अवसर मिला। वन्यजीवों की अठखेलियों और उनकी गतिविधियों को नजदीक से देखकर छात्राएं बेहद उत्साहित नजर आईं।

वन्यजीवों की जीवनशैली से कराया परिचित पार्क के विशेषज्ञ एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत एवं फोरेस्टर राजाराम ने छात्राओं को विभिन्न वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास, भोजन, व्यवहार, जीवनशैली तथा वन्यजीव संरक्षण के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन्यजीव और उनका प्राकृतिक आवास जैव विविधता के संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भ्रमण के बाद डॉ. अशोक ने वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू करने की प्रक्रिया के बारे में छात्राओं को बेहद रोचक एवं व्यावहारिक जानकारी दी। इससे विद्यार्थियों को वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास कार्य की बारीकियों को समझने का अवसर मिला।

क्विज, स्वच्छता और पौधारोपण में भी लिया हिस्सा कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने वन्यजीव क्विज प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही उन्होंने पार्क परिसर में स्वच्छता अभियान और पौधारोपण में भी सक्रिय सहभागिता निभाई। इस दौरान वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में कर्नल बादल वर्मा एवं आलोक गुप्ता ने विशेषज्ञों के रूप में सहयोग प्रदान किया। ग्रीन पीपल सोसायटी के उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस विक्रम सिंह ने पूरे कार्यक्रम का समन्वय करते हुए छात्राओं का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीवों और प्रकृति से जोड़ते हुए उनमें वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।