मुंबई : ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ने रोजमर्रा के काम आसान कर दिए हैं, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में, किसी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, एसवीसी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में अपनी 203 ब्रांच के जरिए साइबर जागरूकता मुहिम चलाई।
इस मुहिम के तहत बैंक कर्मचारियों ने ब्रांच के आसपास की 213 हाउसिंग सोसाइटीज में जाकर 19,061 से ज्यादा लोगों से बातचीत की और उन्हें डिजिटल फ्रॉड से बचने के आसान तरीके बताए।
सेशंस में फिशिंग, फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम, ओटीपी और यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर कोड स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कस्टमर केयर कॉल जैसे मामलों की जानकारी दी गई।
लोगों को यह भी समझाया गया कि बैंक की असली कम्युनिकेशन और आधिकारिक सेंडर आईडी की पहचान कैसे करें।
एसवीसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर, रविंदर सिंह ने कहा, "साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जागरूकता सबसे जरूरी सुरक्षा बन गई है। हमारा प्रयास है कि लोग फ्रॉड की कोशिशों को समय रहते पहचानें और उसका शिकार होने से बचें।
यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब 2026 के पहले छह महीनों में 12.7 लाख से ज्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हुईं और इनमें 10,178 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदिग्ध फ्रॉड ट्रांजैक्शन शामिल रहे।
बैंक ने लोगों से ओटीपी और बैंकिंग जानकारी किसी से शेयर न करने, संदिग्ध लिंक से बचने और किसी अनजान ट्रांजैक्शन की तुरंत जानकारी देने की अपील की। फ्रॉड होने पर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है।
