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माता-पिता की सेवा करने से ही जीवन में सुख शांति और समृद्धि मिलती है: सीमा सिंह

भायंदर। माता-पिता को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है। उनकी सेवा करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है। जो लोग अपने माता-पिता का अपमान करते हैं, ईश्वर उन्हें कभी माफ नहीं करता।

मुख्य बिंदु
  • माता-पिता को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है।
  • उनकी सेवा करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।
  • जो लोग अपने माता-पिता का अपमान करते हैं, ईश्वर उन्हें कभी माफ नहीं करता।
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माता-पिता की सेवा करने से ही जीवन में सुख शांति और समृद्धि मिलती है: सीमा सिंह

भायंदर। माता-पिता को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है।

उनकी सेवा करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है। जो लोग अपने माता-पिता का अपमान करते हैं, ईश्वर उन्हें कभी माफ नहीं करता।

देश की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था मेघाश्रेय द्वारा भायंदर पश्चिम के उत्तन स्थित किशनगोपाल राजपुरिया वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए संस्था की अध्यक्ष तथा प्रख्यात समाजसेवी सीमा सिंह ने उपरोक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि जो माता-पिता दुख झेलकर भी अपनी संतानों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाते हैं, वही संताने उन्हें एक दिन वृद्ध आश्रम में जाने के लिए विवश कर देती हैं।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा करना परम सौभाग्य है। मेघाश्रेय द्वारा आश्रम में भगवान राम और भगवान कृष्ण की आकर्षक झांकियां निकाली गई।

सभी के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। आश्रम के सभी बुजुर्गों के साथ सीमा सिंह ने खुद भोजन किया।

सभी को खाद्य सामग्री और उपहार वितरित किए गए और दिवाली की अग्रिम शुभकामना दी गई। पत्रकारों से बात करते हुए सीमा सिंह ने कहा कि बुजुर्गों के साथ बिताए गए क्षण अत्यंत अमूल्य और ज्ञानवर्धक रहा।

उनके अनुभवों का लाभ समाज और देश को मिलना चाहिए।