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जहाँ टूट गई थी आस, वहाँ गीतांजली ने लिखा विश्वास: जब तीन भाई-बहनों ने एक साथ जीती जेनेटिक कैंसर से जंग

एड्रिनल ग्लैंड और मेडुलरी थायराइड कैंसर की जटिल सर्जरी, विशेषज्ञ टीम ने संभाला चुनौतीपूर्ण उपचार

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जहाँ टूट गई थी आस, वहाँ गीतांजली ने लिखा विश्वास: जब तीन भाई-बहनों ने एक साथ जीती जेनेटिक कैंसर से जंग

उदयपुर। राजसमंद निवासी एक परिवार के तीन भाई-बहनों में दुर्लभ जेनेटिक रूप से जुड़े कैंसर की पहचान और उपचार का मामला सामने आया है।

अलग-अलग समय पर एड्रिनल ग्लैंड और थायराइड से संबंधित गंभीर समस्याओं के साथ पहुंचे तीनों मरीजों का गीतांजली कैंसर सेंटर में विशेषज्ञ टीम ने उपचार किया।

टीम में कैंसर सर्जन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशिष जाखेटीया, कैंसर सर्जन डॉ. अजय यादव तथा एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. राहुल सहलोत और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. नवीन पाटीदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मामले की शुरुआत परिवार की एक बहन से हुई, जिनके दोनों एड्रिनल ग्लैंड में 10 सेंटीमीटर से बड़े ट्यूमर थे। इसके कारण उनका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित था और हृदय पर भी प्रभाव पड़ रहा था। जटिलता और सर्जरी के उच्च जोखिम को देखते हुए उन्हें विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता थी। गीतांजली में जांच के बाद दोनों ट्यूमर सर्जरी द्वारा निकाले गए।

एड्रिनल ट्यूमर की सर्जरी में ब्लड प्रेशर में अचानक अत्यधिक उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है। इसलिए ऑपरेशन से पहले करीब 10 दिनों तक निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार मरीज का एंडोक्राइन ऑप्टिमाइजेशन किया गया।

डॉ. राहुल सहलोत के नेतृत्व में किए गए इस प्रबंधन के साथ सर्जिकल एवं एनेस्थीसिया टीम ने ऑपरेशन को सुरक्षित तरीके से पूरा किया। सर्जरी के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर 260/150 तक पहुंचा, जबकि ट्यूमर निकलने के बाद यह लगभग 60 तक गिर गया।

पहली सर्जरी के बाद फॉलोअप जांच में थायराइड कैंसर का पता चला। करीब दो महीने बाद स्थिति स्थिर होने पर दूसरी सर्जरी की गई। तीन साल से अधिक समय बाद मरीज सामान्य जीवन जी रही हैं और उन्हें कीमोथेरेपी या रेडिएशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।

परिवार में संभावित जेनेटिक कड़ी को देखते हुए जेनेटिक टेस्ट की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों से जांच नहीं हो सकी। करीब दो वर्ष बाद परिवार के एक भाई के थायराइड में सूजन सामने आई। गीतांजली कैंसर सेंटर में विस्तृत जांच के बाद मेडुलरी थायराइड कैंसर की पुष्टि हुई। उनकी सर्जरी की गई और दो वर्ष बाद वे भी सामान्य जीवन जी रहे हैं।

इसके बाद परिवार की तीसरी बहन, जो दोनों से बड़ी हैं, करीब तीन महीने पहले उपचार के लिए पहुंचीं। उनके गले में लगभग 8–9 सेंटीमीटर की गांठ थी।

परिवार में पहले दो सदस्यों की बीमारी को देखते हुए संभावित जेनेटिक सिंड्रोम की आशंका के आधार पर उनका विस्तृत वर्कअप किया गया। जांच में दोनों एड्रिनल ग्लैंड में ट्यूमर तथा गले की गांठ का थायराइड से संबंधित लिम्फ नोड्स तक फैलाव पाया गया।

पहले दोनों एड्रिनल ट्यूमर निकाले गए और इसके बाद गले की गांठ का सर्जिकल उपचार किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे दुर्लभ कैंसर में एक मरीज में बीमारी की पहचान होने पर परिवार के करीबी सदस्यों की समय पर जांच और जेनेटिक काउंसलिंग महत्वपूर्ण है। इस परिवार के तीनों सदस्यों के उपचार में कैंसर सर्जरी, एंडोक्राइन प्रबंधन और एनेस्थीसिया टीम के समन्वय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थायराइड सर्जरी के बाद मरीजों को निर्धारित डोज में थायराइड हार्मोन की दवाएं दी जाती हैं और नियमित एंडोक्राइन फॉलोअप आवश्यक रहता है।

तीनों भाई-बहनों का गीतांजली कैंसर सेंटर में उपचार होना मरीजों के परिवार द्वारा विशेषज्ञ टीम पर जताए गए विश्वास को भी दर्शाता है। एक सदस्य के उपचार के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने भी जांच और उपचार के लिए इसी सेंटर को चुना।