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Udaipur News

विश्व पर्यटन दिवस पर होटल एसोसिएशन उदयपुर की ओर से आयोजित हुई संगोष्ठी

होटल व्यवसायियों ने पर्यटकों का मेवाडी परंपरा से स्वागत अभिनंदन किया

मुख्य बिंदु
  • वर्तमान समय में पर्यटन का स्वरुप बदल रहा है।
  • हमारी प्राचीन धरोहर, विरासत और संस्कृति के साथ देसी-विदेशी पर्यटक ग्रामीण पर्यटन की ओर भी आकर्षित हो रहा है, जहां वह खेत खलिहान के साथ ग्रामीण संस्कृति, उनके खानपान, वेशभूषा और परंपरा को भी जानना चाहता है।
  • होटल व्यवसायियों को पयर्टन के इस बदलते स्वरुप की ओर भी ध्यान देना होगा।
  • विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर होटल एसोसिएशन की ओर से रविवार को पर्यटन पर्व-विरासत, विकास और विजन विषय पर आयोजित संगोष्ठी में सुखाडिया विश्व विद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ कुंजन आचार्य ने यह बात कही।
  • उन्होंने कहा कि पर्यटन उदयपुर की लाइफ लाइन है और दुनिया के लोग इस खुबसूरत शहर को देखना चाहते हैं।
  • यह केवल झीलों का शहर ही नहीं बल्कि इतिहास का दस्तावेज भी है जहां महाराणा प्रताप हुए, जहां का रहन-सहन, भाषा, संस्कृति, विरासत और यहां के जनजाति सबसे अलग और विशिष्ठ बनाते हैं।
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विश्व पर्यटन दिवस पर होटल एसोसिएशन उदयपुर की ओर से आयोजित हुई संगोष्ठी

उदयपुर। वर्तमान समय में पर्यटन का स्वरुप बदल रहा है।

हमारी प्राचीन धरोहर, विरासत और संस्कृति के साथ देसी-विदेशी पर्यटक ग्रामीण पर्यटन की ओर भी आकर्षित हो रहा है, जहां वह खेत खलिहान के साथ ग्रामीण संस्कृति, उनके खानपान, वेशभूषा और परंपरा को भी जानना चाहता है।

होटल व्यवसायियों को पयर्टन के इस बदलते स्वरुप की ओर भी ध्यान देना होगा।विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर होटल एसोसिएशन की ओर से रविवार को पर्यटन पर्व-विरासत, विकास और विजन विषय पर आयोजित संगोष्ठी में सुखाडिया विश्व विद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ कुंजन आचार्य ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि पर्यटन उदयपुर की लाइफ लाइन है और दुनिया के लोग इस खुबसूरत शहर को देखना चाहते हैं।

यह केवल झीलों का शहर ही नहीं बल्कि इतिहास का दस्तावेज भी है जहां महाराणा प्रताप हुए, जहां का रहन-सहन, भाषा, संस्कृति, विरासत और यहां के जनजाति सबसे अलग और विशिष्ठ बनाते हैं।

ओल्ड सिटी यहां का आभूषण है। डॉ आचार्य ने कहा कि आज धरोहर के मूल स्वरुप में बदलाव होता जा रहा है, जबकि यहां आने वाला पर्यटक बदले स्वरुप को नहीं देखना चाहता।

बदलाव हो लेकिन, मूल स्वरुप में छेडछाड करना हमारी विरासत के साथ तर्कसंगत नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि प्राचीन विरासत और संस्कृति के पर्यटन अब एग्रो टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म, बिजनेस टूरिज्म और आध्यात्म टूरिज्म भी बढ गया है और खास बात यह है कि उदयपुर में यह सब उपलब्ध है।

होटल व्यवसायियों को इसका फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश पर्यटक शहर की लोकल वैल्यू को देखना चाहता है इसलिए हम सब की जिम्मेदारी है कि हेरिटेज से लेकर कल्चर तक हमारी लोकल वैल्यू का संरक्षण करें।

डॉ आचार्य ने उदयपुर के पर्यटन को बढाने के लिए आ रही समस्याओं व चुनौतियों को दूर करने की जिम्मेदारी प्रत्येक होटल व्यवसायी की भी है।

वरिष्ठ होटल व्यवसायी अजय सिंह बोहेडा ने शहर की पुराने मोहल्ले ठठेरो की गली और कसारो की ओल तथा शहर सीमा पर बनी पोल व शहर कोट का जिक्र करते हुए कहा कि हमें इन सब का आज संरक्षण करने की जरुरत है।

उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा वृतचित्र तैयार करना चाहिए जिससे पर्यटको को यह पता चले कि आजादी से पहले का उदयपुर कैसा था।प्रारंभ में होटल एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एसोसिएशन का प्रयास है कि उदयपुर आने वाले प्रत्येक पर्यटक को सुरक्षा व संरक्षण मिले।

उन्होंने कहा कि उदयपुर का प्रत्येक होटल व्यवसायी अपनी जिम्मेदारी व कर्तव्य का पूरा कर रहा है। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुदर्शन सिंह कारोही ने भी अतिथियों का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि हमारी विरासत व धरोहर को बचाने के लिए सतत प्रयास जारी है। एसोसिएशन की ओर भी हर समस्या का निदान किया जा रहा है।

एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव कोठारी ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर आकांक्षा गोयल ने किया।होटल एसोसिएशन उपाध्यक्ष उषा शर्मा ने बताया विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष में उदयपुर में कई होटल व्यवसायियों द्वारा बाहर से आने वाले पर्यटकों का स्वागत अभिनंदन किया गया एवं मेवाड़ी परंपरा से रूबरू कराया गया।

इस अवसर पर अंबालाल बोहरा, भगवान वैष्णव, कमल भंडारी, निखिल दोषी, तेजिंदर सिंह रोबिन, आकांक्षा गोयल, मानव भंडारी, मंदिर सिंह चौहान, कृष्णवीर सिंह चौहान, गौरव बंदवाल, संग्राम सिंह, गोवर्धन लाल टांक, ओम पालीवाल व दिनेश चावत सहित विभिन्न सदस्य उपस्थित थे।