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Udaipur News

पर्युषण आया आत्मा को जगाने, कषाय मिटाकर समता का दीप जलाने का संदेश

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ।

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ।

प्रथम दिन सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में आयोजित भव्य धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने पर्युषण को आत्मकल्याण और आत्मशुद्धि का आठ दिवसीय अवसर बताते हुए कहा कि यह ऐसा आध्यात्मिक मेहमान है, जो हमारे जीवन से बुराइयां, कषाय, आसक्ति, मूर्छा और मद दूर करने तथा समता, शांति, सम्यक्त्व और प्रसन्नता का प्रकाश देने आया है।साध्वी श्रीजी ने कहा कि जैसे किसी विशिष्ट अतिथि के स्वागत के लिए घर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाया जाता है, वैसे ही पर्युषण के स्वागत के लिए हृदय रूपी घर की गंदगी को साफ करना होगा।

इसके लिए बाहरी सजावट नहीं, बल्कि आंतरिक भावों की शुद्धि जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पर्युषण के आगमन और प्रस्थान का समय निश्चित है, इसलिए इस अवसर को केवल आयोजन तक सीमित न रखते हुए अपने व्यवहार और विचारों में परिवर्तन लाना चाहिए।उन्होंने मनुष्य की आध्यात्मिक स्थिति को सुषुप्त, अर्धजागृत और पूर्ण जागृत तीन अवस्थाओं में समझाया।

कहा कि कई बार तप, तपस्या और दान का महत्व सुनकर थोड़े समय के लिए अच्छे भाव जागते हैं, लेकिन बाद में व्यक्ति फिर पुराने व्यवहार में लौट जाता है।

यह अर्धजागृत अवस्था है। पर्युषण हमें भीतर से पूर्ण जागृत करने आया है।साध्वी श्रीजी ने परमात्मा के शासन को अस्पताल, गुरु भगवंत को डॉक्टर और स्वयं को मरीज बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वह किस स्थिति में खड़ा है।

इच्छाओं, वासनाओं और आसक्ति रूपी बुखार को आत्मचिंतन के थर्मामीटर से जांचने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मनोवृत्तियों में बदलाव जरूरी है।

जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की सच्ची अभिलाषा ही आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किए।