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पल्स का पंडाल 2026 नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा के लिए लेकर आया इमर्सिव डिजिटल अनुभव

उदयपुर: अग्रणी एफएमसीजी समूह और बहु-व्यवसाय निगम धरमपाल सत्यपाल ग्रुप ने 2026 में पल्स के विशिष्ट उत्सव-केंद्रित ब्रांड आईपी ‘पल्स का

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पल्स का पंडाल 2026 नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा के लिए लेकर आया इमर्सिव डिजिटल अनुभव

उदयपुर : अग्रणी एफएमसीजी समूह और बहु-व्यवसाय निगम धरमपाल सत्यपाल ग्रुप ने 2026 में पल्स के विशिष्ट उत्सव-केंद्रित ब्रांड आईपी ‘पल्स का पंडाल ’ की वापसी की घोषणा की है।

इस वर्ष का संस्करण डिजिटल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ पेश किया गया है। पल्स ऑफ़ इंडिया की सोच के तहत भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और त्योहारों से जुड़ने पर ब्रांड का निरंतर ध्यान इस पहल में आगे बढ़ता है।

पल्स का पंडाल 2026 नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा—इन तीन त्योहारों को एक ही इंटरैक्टिव, मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफ़ॉर्म https://pulsekapandal.in/ पर एक साथ लाता है, जबकि हर उत्सव की मूल भावना बरकरार रखता है।

इमर्सिव और गेमिफाइड अनुभवों के माध्यम से यह अभियान भारत के कोने-कोने के लोगों को जोड़ता है और त्योहारों में भागीदारी को अधिक समकालीन तथा युवाओं के अनुकूल बनाता है।

त्योहारों के कैलेंडर के अनुरूप यह अभियान 20 अक्टूबर तक चलेगा। हर अनुभव संस्कृति, निजी पसंद के अनुसार बदलाव और गेमिफिकेशन को जोड़ता है तथा संबंधित त्योहार की मूल भावना से प्रेरित है।

पल्स ऑफ़ ट्रेडिशन नामक नवरात्रि खंड में प्रतिभागी डिजिटल किरदारों को उत्सवी परिधानों, एक्सेसरीज़ और डांडिया तत्वों से सजा सकते हैं। इससे नवरात्रि की परंपरा को आधुनिक, कॉस्प्ले-प्रेरित अभिव्यक्ति मिलती है।

दुर्गा पूजा के पल्स ऑफ़ शक्ति खंड में प्रतिभागी वर्चुअली अपना दुर्गा पूजा पंडाल बना और अपनी पसंद के अनुसार सजा सकते हैं। वे डिज़ाइन, सजावट और सांस्कृतिक तत्व चुनकर एक अनूठा डिजिटल पंडाल तैयार कर सकते हैं।

दशहरे के पल्स ऑफ़ विक्ट्री खंड में प्रतिभागी वर्चुअल रावण पर निशाना साधते हैं। हर निशाना ऐसी नकारात्मक आदत या व्यक्तिगत कमी का प्रतीक है, जिसे वे छोड़ना चाहते हैं।

अनुभव के अंत में वे उस आदत को छोड़ने का व्यक्तिगत संकल्प लेते हैं। यह अनुभव बुराई पर अच्छाई की जीत के व्यापक प्रतीक से जुड़ता है।

पल्स कैंडी के अभियानों में तकनीक का इस्तेमाल लगातार केवल मीडिया माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक अवसरों को नई पीढ़ी के लिए अधिक सहभागी और प्रासंगिक बनाने के साधन के रूप में किया गया है।

पल्स का पंडाल 2026 इस दृष्टिकोण को और आगे ले जाता है। एडटेक, गेमिफिकेशन, निजी पसंद के अनुरूप अनुभवों और इमर्सिव डिजिटल माध्यमों के जरिए परंपरा को ऐसा अनुभव बनाया गया है, जिसमें लोग सक्रिय रूप से शामिल हो सकें और उसे अपना बना सकें।

चुनिंदा प्रतिभागियों को इसके लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा।

अभियान के बारे में डीएस ग्रुप के कन्फेक्शनरी विभाग में मार्केटिंग के सीनियर जनरल मैनेजर अरविंद कुमार ने कहा कि पल्स का पंडाल एक ऐसे उत्सव-केंद्रित ब्रांड आईपी के रूप में विकसित हुआ है, जो हमारी पल्स ऑफ़ इंडिया प्रतिबद्धता के केंद्र में है।

त्योहारों को केवल संवाद करने के अवसर मानने के बजाय, हमने एक ऐसा मंच बनाया है जहाँ भारत के युवा इन परंपराओं को जान सकते हैं, उनमें हिस्सा ले सकते हैं और अपने तरीके से उन्हें व्यक्त कर सकते हैं।

डांडिया के लिए तैयार होना हो, पंडाल बनाना हो या इस दशहरे पर कोई संकल्प लेना हो—उत्सव हमेशा सबसे पहले आता है और पल्स कैंडी उसका केवल एक हिस्सा है।

तीन सांस्कृतिक रूप से अलग-अलग त्योहारों, तीन गेमिफाइड अनुभवों और एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के साथ पल्स का पंडाल 2026 सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा और भविष्य की ओर देखने वाला ब्रांड बनने की पल्स की महत्वाकांक्षा को मजबूत करता है।

यह भारत की नई पीढ़ी के साथ पल्स ऑफ़ ट्रेडिशन, पल्स ऑफ़ शक्ति और पल्स ऑफ़ विक्ट्री का उत्सव मनाता है।