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थैलेसीमिया मरीज की 30 सेंटीमीटर बढ़ी स्प्लीन की गीतांजलि अस्पताल में सफल सर्जरी

थैलेसीमिया से जूझ रहे 22 वर्षीय युवक को मिली नई उम्मीद, गीतांजलि हॉस्पिटल में सफल सर्जरी*

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थैलेसीमिया मरीज की 30 सेंटीमीटर बढ़ी स्प्लीन की गीतांजलि अस्पताल में सफल सर्जरी
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सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. हेमंत जैन हेमेटोलॉजिस्ट एवं डॉ. नितिन चौधरी की टीम ने किया सफल उपचार उदयपुर। गीतांजलि हॉस्पिटल के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में डॉ. हेमंत जैन एवं टीम ने 22 वर्षीय थैलेसीमिया मेजर मरीज की लगभग 30 सेंटीमीटर बढ़ी हुई स्प्लीन की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। इस जटिल उपचार में हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. नितिन चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मरीज पिछले 15–20 वर्षों से नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर था। उसे लगभग हर सप्ताह 1–2 यूनिट और हर महीने करीब 7–8 यूनिट ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती थी। बढ़ी हुई स्प्लीन के कारण उसका हीमोग्लोबिन, WBC और प्लेटलेट्स भी कम रहते थे।

मरीज ने राजस्थान के कई बड़े शहरों सहित जयपुर, उदयपुर और अहमदाबाद के विभिन्न अस्पतालों में उपचार के लिए परामर्श लिया था। उसकी जटिल स्थिति और सर्जरी से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कई स्थानों पर उसे सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं माना गया और बड़े केंद्र पर उपचार कराने की सलाह दी गई।

इसके बाद मरीज गीतांजलि हॉस्पिटल में डॉ. हेमंत जैन के पास पहुंचा। विस्तृत जांच एवं मूल्यांकन के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। उपचार की योजना में हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. नितिन चौधरी एवं एनेस्थीसिया टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन से पहले मरीज का हीमोग्लोबिन करीब 3 ग्राम था। सर्जरी से पहले उसे 7 यूनिट ब्लड चढ़ाकर ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया।

इसके बाद सर्जरी के दौरान और ऑपरेशन के बाद एक भी यूनिट ब्लड की आवश्यकता नहीं पड़ी। ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

सर्जरी के बाद मरीज की ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई। डेढ़ से दो महीने के फॉलो-अप के दौरान उसे केवल एक यूनिट ब्लड की आवश्यकता पड़ी, जबकि सर्जरी से पहले उसे हर महीने करीब 7–8 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती थी। फॉलो-अप के दौरान उसका हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से ऊपर बना हुआ है।

डॉ. हेमंत जैन के अनुसार, ऐसे जटिल मरीजों में विस्तृत प्री-ऑपरेटिव मूल्यांकन, एनेस्थीसिया प्रबंधन और मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हेमेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नितिन चौधरी के सहयोग से मरीज के रक्त संबंधी जोखिमों और उपचार का समुचित प्रबंधन किया गया।

गीतांजलि हॉस्पिटल के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ टीम और आधुनिक एनेस्थीसिया सुविधाओं के साथ जटिल सर्जिकल मामलों का उपचार किया जा रहा है।