उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (WZCC), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत रविवार 20 सितंबर 2026 शाम उदयपुर के ऐतिहासिक गणगौर घाट पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। पिछोला झील के घाट पर प्रस्तुत इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा उदयपुर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने कहा कला के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को आमजन तक पहुंचाना संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम सीधे लोगों से संवाद स्थापित करते हैं और स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वस्थ जीवनशैली जैसे विषयों पर जागरूकता पैदा करने में प्रभावी साबित होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी एल सालवी सहित केन्द्र के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित इस पहल में सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ सामाजिक जागरूकता को प्रमुखता दी गई।
करीब 12 कलाकारों की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। कलाकारों के अनुसार, नाटक की विषयवस्तु में शहर को स्वच्छ, सुंदर और हरित बनाए रखने के साथ प्लास्टिक से मुक्ति, पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को प्रमुखता दी गई। प्रस्तुति में शहर के विकास और उसकी सांस्कृतिक-ऐतिहासिक पहचान के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश भी दिया गया।
नाटक के लेखक एवं निर्देशक आशुतोष पांडे ने बताया कि कलाकारों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ तैयारी की। दी गई पटकथा के आधार पर कलाकारों ने कई हिस्सों में रचनात्मक इम्प्रोवाइजेशन करते हुए प्रस्तुति को स्थानीय परिवेश से जोड़ा।
उन्होंने बताया कि नुक्कड़ नाटक में शामिल कलाकार केवल पेशेवर रंगकर्मी नहीं हैं। टीम में व्यवसायी, विद्यार्थी, अधिवक्ता, चिकित्सक, नर्स, पैथोलॉजी लैब संचालक, शिक्षक, प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे विभिन्न पेशों से जुड़े लोग शामिल हैं। अपने-अपने पेशे के साथ ये सभी कलाकार रंगमंच और सामाजिक जागरूकता के प्रति समर्पित भाव से जुड़े हुए हैं।
नाटक में स्वच्छता को केवल घर या आसपास के क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए व्यापक पर्यावरणीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने जल स्रोतों, झीलों और नदियों को स्वच्छ रखने के साथ यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्ति के अपने व्यवहार से होती है। ‘हर बूंद महत्वपूर्ण है’ की भावना के साथ जल संरक्षण, पौधारोपण तथा घरों, सड़कों और ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य जागरूकता को भी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया गया और योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। गंगौर घाट पर मौजूद दर्शकों को पर्यावरण, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति व्यक्तिगत स्तर पर जागरूक और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया गया।
आशुतोष पांडे ने कहा कि सभी कलाकारों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और अपने व्यक्तिगत सुझावों एवं रचनात्मक योगदान से प्रस्तुति को आकार दिया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर भारत के निर्माण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
